परिचय
कभी आपने किसी को कहते सुना है — “रवि एक होशियार लड़का है” या “यह सुंदर फूल है”?
इन वाक्यों में “होशियार” और “सुंदर” जैसे शब्द हमें बताते हैं कि रवि कैसा है या फूल कैसा है।
यही शब्द “विशेषण ” कहलाते हैं।
हिंदी व्याकरण में visheshan वह शब्द होता है जो किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है।
आइए जानें विस्तार से —Visheshan ki Paribhasha क्या हैं, इनके प्रकार, पहचान, उदाहरण और रूप निर्माण के नियम।
Visheshan ki Paribhasha
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| Visheshan (विशेषण) | वे शब्द जो किसी संज्ञा या सर्वनाम की गुण, अवस्था या विशेषता बताते हैं, उन्हें विशेषण कहते हैं। |
सरल शब्दों में:
visheshan ki paribhasha यह है कि —
“जो शब्द किसी वस्तु, व्यक्ति, स्थान या प्राणी की विशेषता बताते हैं, वे विशेषण कहलाते हैं।”
उदाहरण:
-
राम साहसी लड़का है।
-
गीता सुंदर गीत गाती है।
-
वह ईमानदार व्यक्ति है।
यहाँ साहसी, सुंदर, ईमानदार — तीनों विशेषण हैं।
विशेषण के प्रकार (Visheshan ke Prakar)
Visheshan ki Paribhasha ke Char Mukhya Bhed –
1. गुणवाचक विशेषण की परिभाषा (Gunvachak Visheshan ki Paribhasha)
जो शब्द किसी संज्ञा या सर्वनाम के गुण, दोष, रूप, रंग या अवस्था को बताते हैं,
उन्हें गुणवाचक विशेषण (Gunvachak Visheshan) कहते हैं।
ये बताते हैं कि “कोई व्यक्ति या वस्तु कैसी है?”
उदाहरण:
-
यह सुंदर फूल है।
-
राम ईमानदार व्यक्ति है।
-
वह दयालु बच्चा सबकी मदद करता है।
यहाँ “सुंदर”, “ईमानदार”, “दयालु” — तीनों गुण बताने वाले शब्द हैं।
2. परिमाणवाचक विशेषण की परिभाषा (Parimanvachak Visheshan ki Paribhasha)
जो शब्द किसी वस्तु या पदार्थ की मात्रा बताते हैं,
उन्हें परिमाणवाचक विशेषण (Parimanvachak Visheshan) कहते हैं।
ये संख्याएँ नहीं, बल्कि “कितना” दर्शाते हैं।
उदाहरण:
-
मेरे पास थोड़ा दूध है।
-
उसके पास ज्यादा पानी है।
-
उसने कुछ मिठाई खाई।
यहाँ “थोड़ा”, “ज्यादा”, “कुछ” मात्रा (परिमाण) दर्शाते हैं।
3. संख्यावाचक विशेषण की परिभाषा (SankhyavachakVisheshan ki Paribhasha)
जो शब्द किसी व्यक्ति या वस्तु की संख्या या क्रम बताते हैं,
उन्हें संख्यावाचक विशेषण (Sankhyavachak Visheshan) कहा जाता है।
उदाहरण:
-
मेरे पास तीन पेन हैं।
-
वह पहला स्थान प्राप्त किया।
-
वहाँ पाँच लड़के खड़े हैं।
यहाँ “तीन”, “पहला”, “पाँच” — संख्या या क्रम बताने वाले विशेषण हैं।
4. सार्वनामिक विशेषण की परिभाषा (Sarvanamik Visheshan ki Paribhasha)
जो शब्द सर्वनाम के रूप में प्रयोग होकर किसी संज्ञा के साथ संबंध या स्वामित्व बताते हैं,
उन्हें सार्वनामिक विशेषण (Sarvanamik Visheshan) कहते हैं।
उदाहरण:
-
यह मेरा घर है।
-
वह उनका विद्यालय है।
-
यह तेरी किताब है।
यहाँ “मेरा”, “उनका”, “तेरी” — स्वामित्व या संबंध दर्शाते हैं।
Visheshan ki Paribhasha Ke kuch do prakar
1. संबंधवाचक विशेषण की परिभाषा (Sambandhvachak Visheshan ki Paribhasha)
वे शब्द जो किसी संज्ञा के साथ संबंध या स्वामित्व बताते हैं,
उन्हें संबंधवाचक विशेषण कहते हैं।
ये शब्द “किसका? किसकी? किसके?” प्रश्न का उत्तर देते हैं।
अधिकतर ये सर्वनाम के रूप में आते हैं।
2. अव्ययी भाव विशेषण की परिभाषा (Avyayibhav Visheshan ki Paribhasha)
वे शब्द जो अव्यय होकर भी किसी संज्ञा/सर्वनाम की विशेषता,
या क्रिया की तीव्रता/अवस्था बताते हैं,
उन्हें अव्ययी भाव विशेषण कहा जाता है।
ये शब्द लिंग/वचन के अनुसार नहीं बदलते।
जैसे — बहुत, अधिक, कम, अत्यंत, खूब आदि।
विशेषण पहचानने के नियम (Visheshan Pehchanne ke Niyam)
नियम 1: ‘कैसा?’ प्रश्न पूछें — उत्तर विशेषण होगा
जब हम किसी वाक्य में “कैसा?” प्रश्न करें और जो शब्द उसका उत्तर दे, वही विशेषण होता है।
उदाहरण:
-
राम साहसी लड़का है।
-
प्रश्न: राम कैसा लड़का है?
-
उत्तर: साहसी → यही विशेषण है।
-
-
वह सुंदर चित्र बनाता है।
-
प्रश्न: चित्र कैसा है?
-
उत्तर: सुंदर → विशेषण।
-
व्याख्या:
यह नियम सबसे आसान और लोकप्रिय तरीका है।
“कैसा?” प्रश्न से हमें गुण या रूप बताने वाला शब्द मिलता है — जो विशेषण होता है।
नियम 2: ‘कितना?’ या ‘कितने?’ का उत्तर विशेषण होता है
जब कोई शब्द किसी वस्तु की संख्या या मात्रा बताए, तो वह भी विशेषण होता है।
🔹 उदाहरण:
-
मेरे पास तीन पेंसिल हैं।
-
प्रश्न: कितनी पेंसिल हैं? → तीन।
-
-
उसने थोड़ा पानी पिया।
-
प्रश्न: कितना पानी पिया? → थोड़ा।
-
व्याख्या:
इस नियम से संख्यावाचक (Sankhyavachak) और परिमाणवाचक (Parimanvachak) विशेषण पहचाने जाते हैं।
ये विशेषण वस्तु की संख्या या मात्रा स्पष्ट करते हैं।
नियम 3: जो शब्द संज्ञा के साथ उसके गुण या दोष को बताए
यदि कोई शब्द किसी व्यक्ति, वस्तु या स्थान की अच्छाई-बुराई, सुंदरता-कुरूपता, बुद्धि या स्वभाव जैसी बातें बताता है — वह विशेषण कहलाता है।
उदाहरण:
-
राधा चतुर लड़की है।
-
गंगा पवित्र नदी है।
-
वह आलसी विद्यार्थी है।
व्याख्या:
यह नियम गुणवाचक विशेषण (Gunvachak Visheshan) की पहचान में मदद करता है।
ये शब्द वस्तु या व्यक्ति के गुण या दोष बताते हैं।
नियम 4: जो शब्द ‘किसका?’ का उत्तर दे — वह संबंधवाचक विशेषण होता है
उदाहरण:
-
यह राम का घर है।
-
प्रश्न: यह घर किसका है? → राम का।
-
-
वह मेरी किताब है।
-
प्रश्न: किताब किसकी है? → मेरी।
-
व्याख्या:
“किसका?” या “किसकी?” या “किसके?” का उत्तर देने वाले शब्द संबंध (Relation) दर्शाते हैं —
इन्हें संबंधवाचक विशेषण (Sambandhvachak Visheshan) कहते हैं।
नियम 5: जिन शब्दों में ‘-वान’, ‘-मयी’, ‘-शील’, ‘-दार’, ‘-प्रिय’ जैसे प्रत्यय हों
ऐसे शब्द अधिकतर विशेषण होते हैं क्योंकि ये गुण या अवस्था दर्शाते हैं।
उदाहरण:
| प्रत्यय | बना हुआ शब्द | अर्थ |
|---|---|---|
| -वान | ईमानदार, भाग्यवान | गुण दर्शाने वाला |
| -शील | धर्मशील, विनम्रशील | स्वभाव बताने वाला |
| -मयी | प्रेममयी, कृपामयी | भरा हुआ |
| -प्रिय | शांतिप्रिय, मेहनतप्रिय | पसंद बताने वाला |
व्याख्या:
ये प्रत्यय (suffixes) किसी संज्ञा को विशेषण बना देते हैं।
जैसे – “प्रेम” (संज्ञा) → “प्रेममयी” (विशेषण)।
नियम 6: विशेषण संज्ञा के पहले आता है (अधिकतर मामलों में)
सामान्यतः विशेषण संज्ञा से पहले प्रयोग होता है।
🔹 उदाहरण:
-
सुंदर फूल खिला है।
-
लाल सेब मीठा होता है।
-
छोटा बच्चा खेल रहा है।
व्याख्या:
हालाँकि यह नियम स्थायी नहीं, पर अधिकतर वाक्यों में विशेषण संज्ञा के पहले आता है — इससे पहचान आसान हो जाती है।
नियम 7: विशेषण संज्ञा के लिंग, वचन और कारक के अनुसार बदल सकता है
विशेषण शब्द अक्सर जिस संज्ञा से जुड़ा होता है, उसी के लिंग और वचन के अनुसार रूप बदलता है।
उदाहरण:
| वाक्य | विशेषण का रूप |
|---|---|
| सुंदर लड़का | पुल्लिंग एकवचन |
| सुंदर लड़की | स्त्रीलिंग एकवचन |
| सुंदर लड़कियाँ | स्त्रीलिंग बहुवचन |
व्याख्या:
इस नियम से समझ आता है कि विशेषण संज्ञा के साथ मेल खाता है।
इसलिए वाक्य में उसका रूप बदलता है।
नियम 8: ‘बहुत’, ‘अत्यंत’, ‘कम’, ‘अधिक’ जैसे शब्द भी कभी-कभी विशेषण होते हैं
जब ये शब्द किसी वस्तु की अवस्था या मात्रा बताएँ, तब इन्हें विशेषण माना जाता है।
उदाहरण:
-
वह बहुत तेज़ धावक है।
-
यह काम अत्यंत कठिन है।
व्याख्या:
ये शब्द अव्ययी भाव विशेषण (Avyayibhav Visheshan) कहलाते हैं, क्योंकि ये अव्यय होते हुए भी विशेषता प्रकट करते हैं।
सारांश तालिका — Visheshan /visheshan ki paribhasha Pehchanne ke Niyam
| क्रमांक | पहचानने का प्रश्न | उदाहरण | विशेषण |
|---|---|---|---|
| 1 | कैसा? | राम साहसी है | साहसी |
| 2 | कितना/कितने? | मेरे पास तीन किताबें हैं | तीन |
| 3 | गुण या दोष? | वह ईमानदार व्यक्ति है | ईमानदार |
| 4 | किसका? | यह मेरी पेंसिल है | मेरी |
| 5 | प्रत्यय (-दार, -वान आदि) | वह दयालु व्यक्ति है | दयालु |
| 6 | संज्ञा से पहले | लाल फूल खिला | लाल |
| 7 | लिंग/वचन के अनुसार बदलना | सुंदर लड़का / सुंदर लड़की | सुंदर |
| 8 | अव्यय रूप | वह बहुत समझदार है | बहुत |
Visheshan ke 20 Udaharan (विशेषण के 20 उदाहरण)
| क्रमांक | वाक्य | विशेषण (रेखांकित) | व्याख्या (Explanation) |
|---|---|---|---|
| 1 | यह एक सुंदर फूल है। | सुंदर | “फूल कैसा है?” — सुंदर → गुण बताने वाला विशेषण। |
| 2 | वह होशियार छात्र है। | होशियार | व्यक्ति का गुण बता रहा है। |
| 3 | आज मौसम ठंडा है। | ठंडा | अवस्था दर्शाने वाला विशेषण। |
| 4 | मोहन ईमानदार व्यक्ति है। | ईमानदार | स्वभाव का गुण बता रहा है। |
| 5 | वह दयालु और शांत स्वभाव की है। | दयालु, शांत | दोनों गुणवाचक विशेषण हैं। |
| 6 | मेरे पास तीन पेन हैं। | तीन | संख्या बता रहा है → संख्यावाचक विशेषण। |
| 7 | उसने थोड़ा पानी पिया। | थोड़ा | मात्रा दर्शा रहा है → परिमाणवाचक विशेषण। |
| 8 | यह राम का घर है। | राम का | संबंध बता रहा है → संबंधवाचक विशेषण। |
| 9 | वह मेरी किताब है। | मेरी | “किसकी किताब?” का उत्तर → विशेषण। |
| 10 | वह बहुत तेज़ दौड़ता है। | बहुत | तीव्रता दर्शाने वाला अव्ययी भाव विशेषण। |
| 11 | यह लाल रंग की साड़ी सुंदर है। | लाल | रंग बताने वाला गुणवाचक विशेषण। |
| 12 | वह छोटा बच्चा खेल रहा है। | छोटा | आकार दर्शाने वाला विशेषण। |
| 13 | सीता सुंदर गाना गाती है। | सुंदर | संज्ञा “गाना” की विशेषता बता रहा है। |
| 14 | वह भाग्यवान व्यक्ति है। | भाग्यवान | प्रत्यय “-वान” वाला गुणवाचक विशेषण। |
| 15 | गंगा पवित्र नदी है। | पवित्र | धार्मिक गुण दर्शाने वाला विशेषण। |
| 16 | यह कमरा बड़ा और रौशन है। | बड़ा, रौशन | दो विशेषण एक साथ प्रयोग हुए हैं। |
| 17 | यह फूल सुगंधित है। | सुगंधित | गंध बताने वाला विशेषण। |
| 18 | वह कम बोलती है। | कम | मात्रा दर्शाने वाला विशेषण। |
| 19 | आज दिन अत्यंत सुंदर है। | अत्यंत | अव्ययी भाव विशेषण (तीव्रता)। |
| 20 | वह मेहनती विद्यार्थी सफल हुआ। | मेहनती | स्वभाव और गुण बताने वाला विशेषण। |
विशेषण का रूप निर्माण (Visheshan ka Roop Nirman)
1. संज्ञा से
अधिकांश विशेषण संज्ञा शब्दों से बनाए जाते हैं।
संज्ञा में कोई प्रत्यय जोड़कर नया विशेषण बनता है।
| मूल संज्ञा | प्रयुक्त प्रत्यय | बना हुआ विशेषण | अर्थ |
|---|---|---|---|
| दया | -लु | दयालु | जिसमें दया हो |
| प्रेम | -मयी | प्रेममयी | प्रेम से भरा हुआ |
| धर्म | -शील | धर्मशील | जो धर्म का पालन करे |
| भाग्य | -वान | भाग्यवान | जिसका भाग्य अच्छा हो |
| सौंदर्य | -मय | सौंदर्यमय | सुंदरता से भरा हुआ |
| ज्ञान | -वान | ज्ञानी | जो ज्ञानी हो |
| बल | -वान | बलवान | जिसमें बल हो |
| बुद्धि | -मान | बुद्धिमान | जिसकी बुद्धि तेज़ हो |
स्पष्टीकरण:
यहाँ देखा जा सकता है कि जब किसी संज्ञा में “-लु, -शील, -वान, -मान, -मयी” जैसे प्रत्यय जोड़े गए, तो नया शब्द विशेषण बन गया जो गुण या अवस्था दर्शा रहा है।
2. क्रिया से
कुछ विशेषण क्रियाओं से बनते हैं — जैसे “चलना”, “हँसना”, “सोचना” आदि।
| मूल क्रिया | बना हुआ विशेषण | अर्थ |
|---|---|---|
| हँसना | हँसमुख | जो मुस्कुराने वाला हो |
| बोलना | बोलचाल वाला | बोलने में निपुण |
| सोचना | सोचनीय | जिस पर विचार किया जाए |
| डरना | डरपोक | जो जल्दी डर जाए |
| भागना | भागता | जो भाग रहा हो |
| चमकना | चमकीला | जो चमक रहा हो |
स्पष्टीकरण:
यहाँ विशेषण क्रिया की अवस्था या गुण को दर्शा रहे हैं।
उदाहरण: हँसमुख चेहरा — यहाँ “हँसमुख” किसी व्यक्ति के स्वभाव का गुण बताता है।
3. उपसर्ग और प्रत्यय जोड़कर
कई बार विशेषण उपसर्ग और प्रत्यय जोड़कर बनाए जाते हैं।
| प्रकार | मूल शब्द | उपसर्ग/प्रत्यय | बना विशेषण | अर्थ |
|---|---|---|---|---|
| उपसर्ग से | उचित | अनु- | अनुचित | जो सही न हो |
| उपसर्ग से | धर्म | अध- | अधर्मिक | जो धर्महीन हो |
| प्रत्यय से | शांति | -प्रिय | शांतिप्रिय | जो शांति को पसंद करे |
| प्रत्यय से | परिश्रम | -शील | परिश्रमी | जो मेहनती हो |
| दोनों से | नीति | अ- + -हीन | अनीतिहीन | जिसमें नीति न हो |
स्पष्टीकरण:
उपसर्ग किसी शब्द के अर्थ को बदलते या नकारते हैं,
जबकि प्रत्यय जोड़कर उसे नया व्याकरणिक रूप देते हैं — जो विशेषण बन जाता है।
4. यौगिक रूप से
कभी-कभी दो शब्द मिलकर एक नया विशेषण बनाते हैं — इसे यौगिक विशेषण कहते हैं।
| संयोजन | बना विशेषण | अर्थ |
|---|---|---|
| सु + सुंदर | सुंदर | बहुत सुंदर |
| महा + बलवान | महाबलवान | अत्यधिक शक्तिशाली |
| अति + बुद्धिमान | अतिबुद्धिमान | बहुत बुद्धिमान |
| अल्प + ज्ञानी | अल्पज्ञानी | थोड़ी जानकारी वाला |
| पर + कृपालु | परकृपालु | दूसरों पर दया करने वाला |
स्पष्टीकरण:
ऐसे विशेषणों में एक शब्द विशेषण का अर्थ बढ़ा देता है या नया गुण जोड़ देता है।
5. विदेशी शब्दों या अंग्रेज़ी शब्दों से बने आधुनिक विशेषण
आज के समय में कुछ अंग्रेज़ी मूल शब्दों से भी विशेषण बन गए हैं, जिन्हें हिंदी ने अपना लिया है।
| अंग्रेज़ी शब्द | हिंदी विशेषण रूप | प्रयोग |
|---|---|---|
| स्मार्ट | स्मार्ट | वह बहुत स्मार्ट लड़की है। |
| एक्टिव | सक्रिय | वह बहुत सक्रिय सदस्य है। |
| पावरफुल | शक्तिशाली | भारत एक शक्तिशाली देश है। |
इस प्रकार विशेषण कई संज्ञा या क्रिया मूल शब्दों में प्रत्यय जोड़कर बनाए जाते हैं।
विशेषज्ञ राय
‘विशेषण’(Visheshan ki Paribhasha) हिंदी व्याकरण का वह हिस्सा है जो भाषा में सुंदरता और स्पष्टता दोनों जोड़ता है।
यदि विद्यार्थी विशेषण को सही पहचानना सीख जाएँ, तो वे किसी भी वाक्य को भावनात्मक और सटीक बना सकते हैं।”
Visheshan ki Paribhasha Ka Mahatva (विशेषण की परिभाषा का महत्व)
विशेषण भाषा की आत्मा हैं — ये वाक्य को भावनात्मक रंग देते हैं।
अगर हम कहें “रवि लड़का है” और “रवि साहसी लड़का है” — दोनों वाक्यों में फर्क स्पष्ट दिखता है।
इसलिए विशेषण वाक्य को जीवंत और अर्थपूर्ण बनाते हैं।
निष्कर्ष
visheshan ki paribhasha यही बताती है कि यह वह शब्द है जो किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है।
विशेषण हमें किसी वस्तु, व्यक्ति या स्थान के गुण, दोष, संख्या या मात्रा के बारे में जानकारी देते हैं।
अगर हम विशेषण को समझ लें, तो हमारी भाषा और लेखन दोनों अधिक प्रभावशाली और सुंदर बन जाते हैं।
तो अगली बार जब आप कहें “यह सुंदर दिन है”, याद रखिए — आपने अभी एक “विशेषण” का कमाल दिखाया है!
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FAQs — Visheshan ki Paribhasha से संबंधित सामान्य प्रश्न
1. Visheshan ki Paribhasha क्या है?
जो शब्द किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं, वे विशेषण कहलाते हैं।
2. विशेषण के प्रकार है?
मुख्यतः छह प्रकार — गुणवाचक, परिमाणवाचक, संख्यावाचक, परिगणनवाचक, संबंधवाचक, और अव्ययी भाव विशेषण।
3. Visheshan aur Sangya me kya antar hai?
संज्ञा नाम बताती है, जबकि विशेषण उस संज्ञा की विशेषता बताता है।
4. Visheshan ki pehchan kaise karen?
वह शब्द जो “कैसा?”, “कितना?”, “किसका?” जैसे प्रश्नों का उत्तर दे — वही विशेषण है।
5. क्या विशेषण बदल सकता है?
हाँ, विशेषण लिंग, वचन और कारक के अनुसार रूप बदल सकता है — जैसे सुंदर लड़का / सुंदर लड़की।
डिस्क्लेमर
यह लेख शिक्षण व शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है।
यह हिंदी व्याकरण के मानक स्रोतों और 2025 के शैक्षणिक पाठ्यक्रम के अनुरूप है।
