परिचय
भाषा मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति है। हम अपने विचार, भावनाएँ, ज्ञान और अनुभव भाषा के माध्यम से व्यक्त करते हैं। भाषा की सबसे छोटी पूर्ण इकाई वाक्य होती है। वाक्य के माध्यम से ही हम किसी बात को बताते, पूछते, आदेश देते या इच्छा प्रकट करते हैं।
हिंदी व्याकरण में वाक्यों को उनके भाव और उद्देश्य के आधार पर कई प्रकारों में बाँटा गया है। इन्हीं में सबसे सामान्य, सरल और अधिक प्रयोग में आने वाला वाक्य है — विधान वाचक वाक्य (Vidhan Vachak Vakya)।
Vidhan Vachak Vakya Ki Paribhasha
परिभाषा:
जिस वाक्य के द्वारा किसी तथ्य, घटना, अवस्था या कार्य का साधारण कथन किया जाए, उसे विधान वाचक वाक्य कहते हैं।
सरल शब्दों में:
जो वाक्य सिर्फ कुछ बताता है, न पूछता है, न आदेश देता है और न ही इच्छा प्रकट करता है — वही Vidhan Vachak Vakya होता है।
उदाहरण:
-
सूर्य पूर्व से उगता है।
-
भारत एक विशाल देश है।
-
वह रोज़ विद्यालय जाता है।
इन वाक्यों में कोई प्रश्न, आज्ञा या भावना नहीं, बल्कि सीधा कथन है।
सामान्य संरचना:
कर्ता + क्रिया + अन्य पद
तालिका द्वारा समझें:
| घटक | विवरण |
|---|---|
| कर्ता | जो कार्य करता है |
| क्रिया | किया गया कार्य |
| कर्म/पूरक | जिस पर कार्य होता है या जानकारी पूरी करता है |
उदाहरण:
| वाक्य | कर्ता | क्रिया | कर्म |
|---|---|---|---|
| राम किताब पढ़ता है। | राम | पढ़ता है | किताब |
| वह सच बोलता है। | वह | बोलता है | सच |
विधान वाचक वाक्य के प्रकार (Vidhan Vachak Vakya Ke Prakar)
1. सकारात्मक विधान वाचक वाक्य ( Sakaratmak Vidhan Vachak Vakya)
जिसमें किसी बात को स्वीकारात्मक रूप में कहा जाए।
उदाहरण:
-
वह ईमानदार है।
-
बच्चे खेल रहे हैं।
2. नकारात्मक विधान वाचक वाक्य (Nakaratmak Vidhan Vachak Vakya)
जिसमें किसी बात का निषेध किया जाए।
उदाहरण:
-
वह आज स्कूल नहीं गया।
-
मुझे यह पुस्तक पसंद नहीं है।
3. सामान्य कथनात्मक विधान वाचक वाक्य (Samanya Kathanatmak Vidhan Vachak Vakya)
जो किसी तथ्य या सत्य को सामान्य रूप से व्यक्त करें।
उदाहरण:
-
पानी जीवन के लिए आवश्यक है।
-
पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है।
विधान वाचक वाक्य पहचानने के नियम (Vidhan Vachak Vakya Pehchanne Ke Niyam)
नियम 1: वाक्य में साधारण कथन होता है
यदि वाक्य किसी घटना, तथ्य, स्थिति या कार्य के बारे में सीधी जानकारी देता है, तो वह विधान वाचक वाक्य होता है।
उदाहरण:
-
भारत एक लोकतांत्रिक देश है।
-
वह प्रतिदिन योग करता है।
यहाँ कोई प्रश्न, आदेश या इच्छा नहीं है—सिर्फ कथन है।
नियम 2: प्रश्न पूछने का भाव नहीं होता
यदि वाक्य में प्रश्नवाचक शब्द (क्या, क्यों, कैसे, कब, कौन) या प्रश्नवाचक चिन्ह (?) नहीं है, तो वह विधान वाचक हो सकता है।
तुलना करें:
-
तुम स्कूल जाते हो। (विधान वाचक)
-
तुम स्कूल जाते हो? (प्रश्नवाचक)
नियम 3: आदेश, विनती या सलाह का भाव नहीं होता
जिस वाक्य में आज्ञा, अनुरोध या निर्देश न हो, वह विधान वाचक वाक्य होता है।
उदाहरण:
-
वह समय पर काम करता है।
-
समय पर काम करो। (आज्ञार्थक)
नियम 4: इच्छा, कामना या प्रार्थना प्रकट नहीं होती
यदि वाक्य में इच्छा, कामना या आशीर्वाद का भाव न हो, तो वह विधान वाचक है।
तुलना:
-
वह स्वस्थ है।
-
वह स्वस्थ रहे। (इच्छावाचक)
नियम 5: वाक्य के अंत में पूर्णविराम (।) होता है
अधिकांश विधान वाचक वाक्यों के अंत में पूर्णविराम (।) लगाया जाता है।
उदाहरण:
-
विद्यार्थी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।।
(हालाँकि केवल पूर्णविराम देखकर निर्णय न करें, भाव भी देखें।)
नियम 6: वाक्य का उत्तर “हाँ” या “नहीं” में नहीं दिया जाता
यदि वाक्य ऐसा है कि उसका उत्तर हाँ/नहीं में नहीं दिया जा सकता, तो वह विधान वाचक होता है।
उदाहरण:
-
सूर्य पूर्व से उगता है।
(यह तथ्य है, प्रश्न नहीं)
नियम 7: वाक्य भावनात्मक नहीं होता
विधान वाचक वाक्य में:
-
विस्मय (!)
-
आश्चर्य
-
तीव्र भावना
नहीं होती।
तुलना:
-
आज मौसम सुहावना है।
-
वाह! आज मौसम कितना सुहावना है! (विस्मयादिबोधक)
नियम 8: दैनिक बोलचाल में सबसे अधिक प्रयोग
जो वाक्य हम रोज़मर्रा की बातचीत, समाचार, किताबों और निबंधों में अधिक सुनते हैं, वे प्रायः Vidhan Vachak Vakya होते हैं।
उदाहरण:
-
शिक्षक कक्षा में पढ़ा रहे हैं।
-
ट्रेन समय पर पहुँची।
विधान वाचक वाक्य के 20 उदाहरण (Vidhan Vachak Vakya Ke 20 Udaharan)
| क्रम |
Vidhan Vachak Vakya |
वाक्य का भाव | क्यों विधान वाचक है? |
|---|---|---|---|
| 1 | राम विद्यालय जाता है। | साधारण कथन | केवल जानकारी देता है |
| 2 | भारत एक महान देश है। | तथ्यात्मक | कोई प्रश्न या आदेश नहीं |
| 3 | वह प्रतिदिन समय पर उठता है। | आदत का वर्णन | सीधा कथन |
| 4 | बच्चे मैदान में खेल रहे हैं। | स्थिति का वर्णन | सूचना प्रदान करता है |
| 5 | सूर्य पूर्व दिशा से उगता है। | सार्वभौमिक सत्य | सामान्य तथ्य |
| 6 | वह किताब पढ़ रहा है। | क्रिया का कथन | न आज्ञा, न प्रश्न |
| 7 | किसान खेत में काम करता है। | पेशे का वर्णन | कथनात्मक वाक्य |
| 8 | मुझे हिंदी भाषा प्रिय है। | भावना का कथन | प्रश्न या इच्छा नहीं |
| 9 | विद्यालय सुबह खुलता है। | समय-सूचना | सीधी जानकारी |
| 10 | शिक्षक कक्षा में पढ़ा रहे हैं। | कार्य का वर्णन | साधारण कथन |
| 11 | मेहनत से सफलता मिलती है। | नीति कथन | सामान्य सत्य |
| 12 | पेड़ पर्यावरण को शुद्ध करते हैं। | तथ्य | जानकारी देता है |
| 13 | वह अपने माता-पिता का सम्मान करता है। | व्यवहार | कथन मात्र |
| 14 | जीवन निरंतर परिवर्तनशील है। | दार्शनिक कथन | कोई भाव आदेश नहीं |
| 15 | आज मौसम सुहावना है। | स्थिति का वर्णन | सूचना प्रधान |
| 16 | गंगा भारत की पवित्र नदी है। | भौगोलिक तथ्य | सामान्य कथन |
| 17 | विद्यार्थी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। | वर्तमान क्रिया | कथनात्मक |
| 18 | समय बहुत मूल्यवान होता है। | नीति वाक्य | न प्रश्न न इच्छा |
| 19 | वह सच बोलता है। | गुण का वर्णन | साधारण सूचना |
| 20 | पुस्तक ज्ञान का स्रोत है। | सामान्य सत्य | सीधा कथन |
विधान वाचक वाक्य का रूप निर्माण (Vidhan Vachak Vakya Ka Rup Nirman)
1. कर्ता + क्रिया से रूप-निर्माण
विधान वाचक वाक्य का सबसे मूल रूप होता है—
कर्ता + क्रिया
उदाहरण:
-
राम सोता है।
-
बच्चा हँसता है।
यहाँ वाक्य केवल यह बता रहा है कि कौन क्या करता है।
2. कर्ता + कर्म + क्रिया से रूप-निर्माण
जब क्रिया का प्रभाव किसी वस्तु पर पड़ता है, तब कर्म जुड़ जाता है।
संरचना:
कर्ता + कर्म + क्रिया
उदाहरण:
-
राम किताब पढ़ता है।
-
वह दूध पीता है।
यह सबसे सामान्य विधान वाचक संरचना है।
3. काल के अनुसार रूप-निर्माण
विधान वाचक वाक्य तीनों कालों में बन सकता है—
| काल | उदाहरण |
|---|---|
| वर्तमान काल | वह स्कूल जाता है। |
| भूत काल | वह स्कूल गया था। |
| भविष्य काल | वह स्कूल जाएगा। |
हर काल में वाक्य सूचना ही देता है, इसलिए विधान वाचक रहता है।
4. सकारात्मक और नकारात्मक रूप-निर्माण
(क) सकारात्मक विधान वाचक
जिसमें बात को स्वीकार किया जाए।
-
वह मेहनती है।
-
बच्चा खेल रहा है।
(ख) नकारात्मक विधान वाचक
जिसमें निषेध हो, पर कथन बना रहे।
-
वह आज नहीं आया।
-
मुझे यह फिल्म पसंद नहीं है।
“नहीं” होने के बाद भी वाक्य विधान वाचक रहता है।
5. वाच्य के अनुसार रूप-निर्माण
विधान वाचक वाक्य तीनों वाच्यों में हो सकता है:
| वाच्य | उदाहरण |
|---|---|
| कर्तृवाच्य | राम पत्र लिखता है। |
| कर्मवाच्य | पत्र राम द्वारा लिखा जाता है। |
| भाववाच्य | पत्र लिखा जा रहा है। |
तीनों में साधारण कथन है।
6. एकार्थक और विस्तारयुक्त रूप-निर्माण
(क) सरल रूप
-
वह पढ़ता है।
(ख) विस्तारयुक्त रूप
-
वह रोज़ सुबह पुस्तकालय में बैठकर ध्यान से पढ़ता है।
दोनों विधान वाचक हैं, अंतर केवल विस्तार का है।
7. विशेषण और क्रिया-विशेषण से रूप-निर्माण
विशेषण और क्रिया-विशेषण वाक्य को अधिक स्पष्ट बनाते हैं।
उदाहरण:
-
मेहनती छात्र मन लगाकर पढ़ता है।
-
वह बहुत धीरे बोलता है।
कथन और स्पष्ट हो जाता है।
8. भाव पक्ष से रूप-निर्माण
विधान वाचक वाक्य का भाव होता है—
-
तटस्थ
-
शांत
-
सूचना प्रधान
उदाहरण:
-
जीवन संघर्ष का नाम है।
-
समय अमूल्य होता है।
न आदेश, न प्रश्न, न भावना—सिर्फ कथन।
9. तालिका: रूप-निर्माण का संक्षेप
| आधार | रूप |
|---|---|
| मूल संरचना | कर्ता + क्रिया |
| विस्तृत संरचना | कर्ता + कर्म + क्रिया |
| काल | वर्तमान / भूत / भविष्य |
| स्वरूप | सकारात्मक / नकारात्मक |
| वाच्य | कर्तृ / कर्म / भाव |
| भाव | साधारण कथन |
विशेषज्ञ राय
हिंदी व्याकरण विशेषज्ञों के अनुसार,
“विधान वाचक वाक्य भाषा (Vidhan Vachak Vakya) की आधारशिला है। इसके बिना विचारों की स्पष्ट अभिव्यक्ति संभव नहीं। प्रतियोगी परीक्षाओं और भाषा शिक्षण में इसका ज्ञान अनिवार्य है।”
निष्कर्ष
कहा जा सकता है कि विधान वाचक वाक्य (Vidhan Vachak Vakya) हिंदी व्याकरण का सबसे सरल, उपयोगी और महत्वपूर्ण वाक्य प्रकार है। यह हमारे दैनिक जीवन, शिक्षा, लेखन और संवाद का मूल आधार है।
यदि विद्यार्थी विधान वाचक वाक्य को भली-भाँति समझ लें, तो अन्य वाक्य प्रकारों को सीखना अत्यंत आसान हो जाता है।
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FAQs (5 प्रश्न-उत्तर)
प्रश्न 1: विधान वाचक वाक्य क्या होता है?
उत्तर:
जिस वाक्य के द्वारा किसी तथ्य, घटना, अवस्था या कार्य का साधारण कथन किया जाए, उसे विधान वाचक वाक्य कहते हैं।
प्रश्न 2: क्या नकारात्मक वाक्य भी विधान वाचक होते हैं?
उत्तर:
हाँ। यदि वाक्य में “नहीं” होने के बाद भी वह केवल कथन करता है और कोई प्रश्न या आदेश नहीं देता, तो वह नकारात्मक विधान वाचक वाक्य कहलाता है।
उदाहरण: वह आज विद्यालय नहीं गया।
प्रश्न 3: Vidhan Vachak Vakya और Prashn Vachak Vakya में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर:
विधान वाचक वाक्य जानकारी देता है, जबकि प्रश्नवाचक वाक्य किसी बात के बारे में पूछता है।
उदाहरण:
-
वह स्कूल जाता है। (विधान वाचक)
-
क्या वह स्कूल जाता है? (प्रश्नवाचक)
प्रश्न 4: Vidhan Vachak Vakya की पहचान कैसे करें?
उत्तर:
यदि वाक्य में न प्रश्न, न आदेश, न इच्छा और न विस्मय हो, बल्कि केवल साधारण कथन हो, तो वह विधान वाचक वाक्य होता है।
प्रश्न 5: क्या विधान वाचक वाक्य सभी कालों में हो सकता है?
उत्तर:
हाँ। विधान वाचक वाक्य वर्तमान, भूत और भविष्य—तीनों कालों में हो सकता है।
उदाहरण:
-
वह पढ़ता है। (वर्तमान)
-
वह पढ़ता था। (भूत)
-
वह पढ़ेगा। (भविष्य)
प्रश्न 6: विधान वाचक वाक्य का प्रयोग कहाँ अधिक होता है?
उत्तर:
Vidhan Vachak Vakya का प्रयोग दैनिक बोलचाल, समाचार, पाठ्यपुस्तकों, निबंध, वर्णनात्मक लेखन और उत्तर लेखन में सबसे अधिक होता है।
डिस्क्लेमर
यह लेख पूर्णतः शैक्षणिक उद्देश्य से तैयार किया गया है। उदाहरण और व्याख्या छात्रों की सुविधा के लिए सरल की गई हैं। यह किसी आधिकारिक पाठ्यपुस्तक का स्थान नहीं लेता।
