परिचय
कभी-कभी हम किसी धार्मिक कथा, लोकगीत या भक्ति रचना में एक विशिष्ट लय और बोलचाल के छंद सुनते हैं—जो न तो पूरी तरह चौपाई जैसा लगता है और न ही दोहा जैसा। इसकी धुन में लोक-सुगंध भी होती है और गीतात्मकता भी। यही वह छंद है जिसे हम Sortha Chhand के नाम से जानते हैं।
भारत की लोकभाषाओं — जैसे अवधी, ब्रज, बुंदेलखंडी — में यह छंद सदियों से लोकप्रिय है। 2025 में भी विद्यालयों से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं तक में सोरठा छंद को पढ़ाया जाता है, इसलिए इसे सही और सरल तरीके से समझना छात्रों, शिक्षकों और हिन्दी प्रेमियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
Sortha Chhand Ki Paribhasha-
सोरठा छंद वह छंद है जिसमें दोहा जैसा छंद-विधान मिलता है, लेकिन इसकी पहली पंक्ति और तीसरी पंक्ति लंबाई में उलटी होती हैं, अर्थात् —
- पहली और तीसरी पंक्तियाँ 11 वर्ण
- दूसरी और चौथी पंक्तियाँ 13 वर्ण
सरल शब्दों में:
| पंक्ति | वर्ण / मात्रा संरचना | वर्ण संख्या |
| 1 | छोटी + मिश्रित | 11 वर्ण |
| 2 | बड़ी + गम्भीर | 13 वर्ण |
| 3 | 1st लाइन जैसी | 11 वर्ण |
| 4 | 2nd लाइन जैसी | 13 वर्ण |
सोरठा छंद के प्रकार (Sortha Chhand Ke Prakar)
| प्रकार | विवरण |
| लौकिक सोरठा | लोकगीतों, कथाओं, भजन-कीर्तन में प्रयोग |
| काव्यात्मक सोरठा | कवियों द्वारा साहित्यिक रचनाओं में प्रयुक्त |
| नीतिक सोरठा | नीति, धर्म, शिक्षा और नैतिक संदेश देने वाले सोरठा |
सोरठा छंद पहचानने के नियम (Sortha Chhand Pehchanne Ke Niyam)
1. सबसे बड़ा संकेत — 11–13–11–13 का पैटर्न
सोरठा की चार पंक्तियाँ होती हैं, और हर पंक्ति में वर्णों की संख्या निश्चित होती है:
- 1st लाइन → 11 वर्ण
- 2nd लाइन → 13 वर्ण
- 3rd लाइन → 11 वर्ण
- 4th लाइन → 13 वर्ण
यह “उलटा-दोहा” कहलाता है
(क्योंकि दोहा 13–11–13–11 होता है)
तो यदि छंद में यह संख्यात्मक लय दिखे—
वह सोरठा छंद है।
2. पहली और तीसरी लाइन छोटी, दूसरी और चौथी लंबी
यह बहुत आसान ट्रिक है:
- 1st + 3rd = छोटी लाइनें (11)
- 2nd + 4th = लंबी लाइनें (13)
अगर आपको पढ़ते-पढ़ते लगे कि
“पहली लाइन हल्की है और अगली लंबी…”
तो 90% संभावना है कि वह सोरठा छंद है।
3. छंद की लय सुनकर पहचान
सोरठा की लय बहुत सहज और भक्ति-धुन जैसी होती है। पढ़ते समय ऐसा लगता है:
- हल्का → गम्भीर → हल्का → गम्भीर
(11 → 13 → 11 → 13)
यही इसका प्राकृतिक संगीत है।
4. भाव की मुख्य बात दूसरी और चौथी पंक्तियों में
अधिकतर यह छंद ऐसा लिखा जाता है कि—
- पहली लाइन परिचय
- दूसरी लाइन मुख्य बात
- तीसरी लाइन पूरक
- चौथी लाइन निष्कर्ष या संदेश
यह क्रम सोरठा को बहुत आसान बनाता है।
5. दोहा जैसा लगता है, पर उलटी संरचना से पहचान लें
जरूरी नियम:
| छंद | पैटर्न |
| दोहा | 13–11–13–11 |
| Sortha | 11–13–11–13 |
अगर दोहा उलटा कर दें → तैयार!
यही सबसे आसान और असरदार पहचान है।
6. हर पंक्ति स्वतंत्र भी हो सकती है
- वाक्य छोटे
- भाव सरल
- लय स्थिर
इसलिए यह पढ़ते ही “लोकगीत” जैसा लगता है।
भाषा अक्सर सरल, भक्ति या लोक-शैली वाली
सोरठा आमतौर पर इन जगहों पर मिलता है:
- भक्ति गीत
- राम-कथा, कृष्ण-कथा
- नीति-उपदेश
- लोकगीत
सोरठा छंद के उदाहरण (Sortha Chhand Ke 20 Udaharan)
- भाँति-भाँति की चाह, मन के भीतर जागे।
लोभ मोह की राह, मानव को भर भागे। - जीवन का उपहार, सबको मिलता रोज़ है।
कर्मों का व्यापार, हर मन में संजोए है। - भूले बिसरे लोग, आए जाते समय पर।
अपने अपने योग, रखते मन के ठौर पर। - किसने क्या न सोचा, इस जीवन के दौर में।
सपनों का ही टोचा, हर दिल की हक़बोर में। - रंग बिरंगे भोग, संसार में पलते हैं।
लालच वाले लोग, बस दौलत में चलते हैं। - हँसी खुशी का मेल, हर घर में तो होता है।
दुख के बाद का खेल, जीवन को संजोता है। - आशा का ही दीप, मन में जलता रहता है।
भय का भारी चीप, सुख को खा ही जाता है। - कर्मों का संगीत, हर इंसान बजाता है।
सत्पथ का ही गीत, जीवन को सजाता है। - भक्ति का रस रोग, मन को शांत बनाता है।
दुनिया के सब योग, बस भीतर उलझाता है। - सपनों की ये राह, हर मन में बसती है।
कठिनाई की चाह, इंसान को कसती है। - दौलत की मत चाह, मन को व्यर्थ जलाती है।
संतोष की ही राह, सच्ची खुशी बुलाती है। - बीती बातें रोग, मन को कष्ट ही देती हैं।
क्षमा का मधुर योग, जीवन राहें देती हैं। - हर पल का संयोग, किस्मत से ही आता है।
मेहनत का ही योग, इंसान को बनाता है। - झूठों का संजोग, दुनिया में भटका देता।
सत्कर्मों का योग, मानव को सीधा करता। - मौसम का संचार, जीवन में रंग भरता।
वर्षा का उपहार, धरती को नव स्वर देता। - दिल में जब संयोग, प्रेम का बह जाता है।
नफरत का ही रोग, रिश्तों को खा जाता है। - वादों का संचार, रिश्ता मजबूत बनाता।
झूठों का व्यवहार, जीवन को घटाता। - कर्मों की पहचान, हर दिन नयी बनती है।
न्याय की ही तान, सच्चाई पर चलती है। - स्वार्थ भरा संयोग, दिलों को तोड़ ही देता।
प्यार का मधुर रोग, हर दुख को धो ही देता। - संघर्ष भरी राह, इंसान को गढ़ देती है।
साहस का ही चाह, सारी मुश्किल हर लेती है।
सोरठा छंद का रूप निर्माण (Sortha Chhand Ka Rup Nirman)
1. संज्ञा आधारित रूप
उदाहरण:
-
भक्त → भक्तिमयी पंक्ति → सोरठा शैली
-
राम → राम-भक्ति अवधारणाएँ → सोरठा संरचना
2. विशेषण आधारित रूप
उदाहरण:
-
मीठा → मीठी लय → सोरठा की भावपूर्ण रचना
-
मधुर → मधुर अनुभव → छंद की सुंदरता बढ़ती है
3. क्रिया आधारित रूप
उदाहरण:
-
गाना → गाते → सोरठा गाते हुए भाव निर्मित
-
सुनना → सुनते → सोरठा की लय सुनते ही पहचान
4. लोक-भाव निर्माण
सोरठा अक्सर लोकशैली, भक्ति, नीति और परंपरा से मिलकर बनता है।
इसलिए इसमें:
-
सरल भाषाशैली
-
लोकरंग
-
संवादात्मक शैली
प्राकृतिक रूप से आ जाती है।
विशेषज्ञ राय
Sortha Chhand हिंदी साहित्य का अत्यंत सुन्दर और सरल छंद है। इसकी खासियत यह है कि विद्यार्थी इसे बहुत आसानी से सीख सकते हैं, और कवि इसे गहरे भाव व्यक्त करने के लिए प्रयोग कर सकते हैं। सोरठा की लय आत्मिक शांति और अध्यात्म से जुड़ी है, जो इसे आज भी प्रासंगिक बनाती है।”
निष्कर्ष
Sortha Chhand (सोरठा छंद) केवल एक छंद नहीं — बल्कि भारतीय लोक-साहित्य की आत्मा है। इसकी सरलता, माधुर्य और लय इसे हर उम्र के पाठकों और विद्यार्थियों के लिए आकर्षक बनाते हैं। उम्मीद है कि इस लेख से आप Sortha Chhand को पहचानने, लिखने और समझने में सक्षम हुए होंगे।
सीखते रहिए, लिखते रहिए — आपका ज्ञान ही आपका उजाला है!
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सामान्य प्रश्न-उत्तर
1. सोरठा छंद क्या है?
यह दोहा जैसा छंद है, जिसकी चार पंक्तियों में 11-13-11-13 वर्ण होते हैं।
2. Sortha और Doha में क्या अंतर है?
दोहा = 13-11-13-11
Sortha = उलटा, यानी 11-13-11-13
3. Sortha Chhand कहाँ प्रयोग होता है?
भजन, लोकगीत, नीति-कथाओं और साहित्यिक रचनाओं में।
4. क्या Sortha Chhand प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछा जाता है?
हाँ, CTET, TGT, PGT जैसी परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है।
5. Sortha Chhand कैसे याद रखें?
एक लाइन छोटी, अगली बड़ी — यही उलटी संरचना याद रखो।
डिस्क्लेमर
यह सामग्री केवल शैक्षणिक, जानकारीपूर्ण और अध्ययन उद्देश्य के लिए तैयार की गई है। लेख में दिए गए उदाहरण, छंद, विवरण और व्याख्याएँ सीखने को सरल बनाने के लिए लिखे गए हैं।
