Updated : 14.02.2026
परिचय (Parichay)
छंद (Chhand) हिंदी काव्यशास्त्र का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। कक्षा 9 से 12 तक CBSE, RBSE, UP Board, MP Board आदि सभी बोर्डों में छंद से 4 से 10 अंक जरूर आते हैं। TET, CTET, UPSC, SSC, RPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में भी छंद पहचानना और उदाहरण देना पूछा जाता है।
छंद के बिना काव्य अधूरा है। यह कविता को लय, ताल और संगीतमय बनाता है। रामचरितमानस, कबीर के दोहे, सूरदास के पद, निराला के मुक्त छंद – सब छंद के अलग-अलग रूप हैं।
आइये हम छंद किसे कहते हैं, परिभाषा, प्रकार, मात्रिक-वर्णिक-मुक्त छंद, उदाहरण, परीक्षा टिप्स और FAQ तक सब कुछ विस्तार से समझेंगे।
छंद क्या है (Chhand Kya Hai)
छंद हिंदी काव्य की वह व्यवस्था है जो कविता को लय, ताल और संगीतमय बनाती है। यह कविता की आत्मा है। छंद के बिना कविता अधूरी लगती है। छंद दो मुख्य प्रकार के होते हैं: मात्रिक और वर्णिक। आधुनिक कविता में मुक्तक छंद भी बहुत प्रचलित है।
छंद की परिभाषा (Chhand Ki Paribhasha)
छंद वह व्यवस्था है जिसमें अक्षरों या मात्राओं की निश्चित संख्या, यति (विराम), तुक (अंत में समान ध्वनि) और गति (लय) का पालन किया जाता है। सरल शब्दों में: छंद कविता को एक निश्चित लयबद्ध ढांचा देता है, जिससे पढ़ते समय संगीत जैसा आनंद आता है। छंद काव्य शास्त्र का मूल आधार है और संस्कृत से हिंदी तक फैला हुआ है।
छंद के प्रकार (Chhand Ke Prakar)
हिंदी छंद मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं: मात्रिक, वर्णिक और मुक्तक। ये प्रकार कविता की संरचना को निर्धारित करते हैं। मात्रिक छंद मात्राओं पर आधारित है, वर्णिक वर्णों पर, और मुक्तक किसी बंधन से मुक्त है। ये प्रकार विभिन्न कवियों द्वारा विभिन्न रसों के लिए उपयोग किए जाते हैं।
छंद के भेद (Chhand Ke Bhed)
छंद के मुख्य भेद निम्न हैं: मात्रिक छंद, वर्णिक छंद और मुक्तक छंद। ये भेद कविता की लय और ताल को अलग-अलग तरीके से प्रभावित करते हैं। मात्रिक छंद में मात्राओं की गिनती होती है, जबकि वर्णिक में अक्षरों की। मुक्तक भेद आधुनिक कविता में लोकप्रिय है।
मात्रिक छंद (Matrik Chhand)
मात्रिक छंद वह है जिसमें मात्राओं की संख्या निश्चित होती है, अक्षरों की नहीं। इसमें लय और ताल पर विशेष ध्यान दिया जाता है। उदाहरण: दोहा, सोरठा, चौपाई, रोला, गीतिका आदि। यह छंद हिंदी काव्य में सबसे अधिक उपयोग होता है।
वर्णिक छंद (Varnik Chhand)
वर्णिक छंद में वर्णों (अक्षरों) की संख्या निश्चित होती है। यह अधिक ओजपूर्ण और भव्य होता है। उदाहरण: सवैया, कवित्त, हरिगीतिका आदि। वर्णिक छंद संस्कृत से प्रेरित है और वीर रस के लिए उपयुक्त है।
मुक्तक छंद (Muktak Chhand)
मुक्तक छंद में न तो मात्रा की बंधन है और न वर्णों का। यह आधुनिक कविता में बहुत प्रयोग होता है। उदाहरण: सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, सुमित्रानंदन पंत, मुक्तिबोध की कविताएँ। मुक्तक छंद रचनाकार को पूर्ण स्वतंत्रता देता है।
दोहा छंद (Doha Chhand)
दोहा सबसे प्रसिद्ध और सरल मात्रिक छंद है। पहला और तीसरा चरण 13 मात्राएँ, दूसरा और चौथा चरण 11 मात्राएँ, यति 6+7 और 6+5 पर होती है। दोहा छंद में अंत में तुक जरूरी है। यह छंद संत कविता में बहुत लोकप्रिय है।
सोरठा छंद (Sortha Chhand)
सोरठा दोहे का उल्टा रूप है। पहला और तीसरा चरण 11 मात्राएँ, दूसरा और चौथा चरण 13 मात्राएँ होती हैं। यति 6+5 और 6+7 पर होती है। सोरठा छंद भी मात्रिक है और रहीम जैसे कवियों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है।
चौपाई छंद (Chaupai Chhand)
चौपाई रामचरितमानस का मुख्य छंद है। हर चरण में 16 मात्राएँ, यति 8+8 पर होती है। अंत में तुक जरूरी है। चौपाई छंद भक्ति और वीर रस के लिए उपयुक्त है और तुलसीदास की रचनाओं में प्रमुख है।
रोला छंद (Rola Chhand)
रोला छंद में 24 मात्राएँ प्रति चरण होती हैं। यति 11+13 या 12+12 पर होती है। अंत में तुक जरूरी है। रोला छंद सूरदास जैसे भक्ति कवियों की पदावली में बहुत इस्तेमाल होता है।
गीतिका छंद (Geetika Chhand)
गीतिका छंद में 26 मात्राएँ प्रति चरण होती हैं। यति 12+14 या 13+13 पर होती है। यह छंद गीतात्मक और लयपूर्ण है। जयशंकर प्रसाद जैसे कवियों की रचनाओं में इसका उपयोग मिलता है।
हरिगीतिका छंद (Harigitika Chhand)
हरिगीतिका छंद में 28 मात्राएँ प्रति चरण होती हैं। यति 12+16 या 14+14 पर होती है। यह छंद मैथिलीशरण गुप्त जैसे राष्ट्रवादी कवियों की रचनाओं में प्रसिद्ध है। हरिगीतिका छंद वीर और ओजपूर्ण होता है।
उल्लाला छंद (Ullala Chhand)
उल्लाला छंद में 28 मात्राएँ होती हैं। यति 14+14 पर होती है। यह छंद बहुत लयबद्ध और गीतात्मक होता है। उल्लाला छंद संस्कृत से प्रेरित है और हिंदी कविता में कम इस्तेमाल होता है।
बरवै छंद (Barvai Chhand)
बरवै छंद में 24 मात्राएँ (12+12) होती हैं। यह छोटा और मधुर छंद है। बरवै छंद बिहारी जैसे कवियों के दोहों में प्रयोग होता है। यह छंद भावपूर्ण और संक्षिप्त होता है।
सवैया छंद (Savaiya Chhand)
सवैया वर्णिक छंद है। इसमें 31 से 33 वर्ण प्रति चरण होते हैं। सवैया छंद भव्य और ओजपूर्ण होता है। बिहारी जैसे कवियों के सवैये प्रसिद्ध हैं और वीर रस के लिए उपयुक्त हैं।
कवित्त छंद (Kavitt Chhand)
कवित्त वर्णिक छंद है। इसमें 31 वर्ण प्रति चरण होते हैं। कवित्त छंद ओज और वीर रस के लिए प्रसिद्ध है। भूषण जैसे कवियों के कवित्त बहुत लोकप्रिय हैं।
छंद के उदाहरण (Chhand Ke Udaharan)
छंद के उदाहरण विभिन्न कवियों से लिए जा सकते हैं। दोहा का उदाहरण कबीर से, चौपाई तुलसीदास से, सवैया बिहारी से, कवित्त भूषण से और रोला सूरदास से। ये उदाहरण छंद की लय को स्पष्ट करते हैं।
छंद के अंग (Chhand Ke Ang)
छंद के मुख्य अंग हैं: चरण, यति, तुक, गति और गण। ये अंग कविता की संरचना बनाते हैं। चरण पंक्ति है, यति विराम, तुक अंत की समान ध्वनि, गति लय और गण मात्राओं का समूह है।
छंद में चरण (Chhand Mein Charan)
छंद में चरण कविता की एक पंक्ति को कहते हैं। दोहे में 4 चरण होते हैं। चरण की लंबाई छंद के प्रकार पर निर्भर करती है। चरण ही छंद की बुनियाद है।
छंद में यति (Chhand Mein Yati)
छंद में यति वह स्थान है जहाँ कविता में विराम लेते हैं। दोहे में यति 6+7 और 6+5 पर होती है। यति कविता को पढ़ने में आसान बनाती है।
छंद में तुक (Chhand Mein Tuk)
छंद में तुक चरण के अंत में समान ध्वनि को कहते हैं। दोहे में दूसरा और चौथा चरण तुकांत होते हैं। तुक कविता को मधुर बनाती है।
छंद में गति (Chhand Mein Gati)
छंद में गति कविता पढ़ते समय जो लय बनती है, उसे कहते हैं। चौपाई में मध्यम गति होती है, जबकि रोला में तेज गति। गति छंद की जान है।
छंद में गण (Chhand Mein Gan)
छंद में गण मात्राओं के समूह को कहते हैं। मुख्य गण हैं: यगण (गुरु-लघु), रगण (लघु-गुरु), नगण (लघु-लघु-गुरु), भगण (गुरु-लघु-लघु)। गण वर्णिक छंद में महत्वपूर्ण है।
मात्रा छंद क्या है (Matra Chhand Kya Hai)
मात्रा छंद वह है जिसमें मात्राओं की गिनती होती है, वर्णों की नहीं। उदाहरण: दोहा, चौपाई, रोला। मात्रा छंद हिंदी काव्य में सबसे अधिक उपयोग होता है।
वर्ण छंद क्या है (Varn Chhand Kya Hai)
वर्ण छंद वह है जिसमें वर्णों (अक्षरों) की संख्या निश्चित होती है। उदाहरण: सवैया, कवित्त। वर्ण छंद संस्कृत से प्रेरित है और वीर रस के लिए उपयुक्त है।
छंद की परिभाषा उदाहरण सहित (Chhand Ki Paribhasha Udaharan Sahit)
छंद वह व्यवस्था है जो कविता को लयबद्ध बनाती है। उदाहरण: दोहा – 13-11 मात्राएँ, जैसे कबीर का दोहा। यह परिभाषा काव्य शास्त्र से ली गई है।
छंद के प्रकार उदाहरण सहित (Chhand Ke Prakar Udaharan Sahit)
छंद के प्रकार: मात्रिक (दोहा – कबीर), वर्णिक (सवैया – बिहारी), मुक्तक (निराला की कविताएँ)। ये प्रकार विभिन्न रसों के लिए उपयोगी हैं।
हिंदी छंद के प्रकार (Hindi Chhand Ke Prakar)
हिंदी छंद के प्रकार हैं: मात्रिक, वर्णिक और मुक्तक। ये प्रकार संस्कृत से लिए गए हैं। हिंदी छंद काव्य को समृद्ध बनाते हैं।
कक्षा 10 छंद (Kaksha 10 Chhand)
कक्षा 10 में मुख्य रूप से पढ़ाए जाते हैं: दोहा, सोरठा, चौपाई, रोला, सवैया, कवित्त। ये छंद CBSE और UP Board में महत्वपूर्ण हैं।
छंद हिंदी व्याकरण (Chhand Hindi Vyakaran)
छंद हिंदी व्याकरण का महत्वपूर्ण अंग है। यह काव्य शास्त्र का हिस्सा है। छंद व्याकरण में कविता की संरचना सिखाता है।
छंद MCQ (Chhand MCQ)
नीचे 10 उदाहरण MCQ दिए गए हैं:
- नीचे 10 उदाहरण MCQ दिए गए हैं:दोहा छंद में कितनी मात्राएँ होती हैं?
a) 13-11
b) 11-13
c) 16-16
d) 24-24
उत्तर: a) 13-11
चौपाई छंद में यति कहाँ होती है?
a) 6+7
b) 8+8
c) 12+12
d) 14+14
उत्तर: b) 8+8
सवैया छंद किस प्रकार का है?
a) मात्रिक
b) वर्णिक
c) मुक्तक
d) गद्य
उत्तर: b) वर्णिक
छंद का मुख्य अंग क्या है?
a) चरण
b) यति
c) तुक
d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: d) उपर्युक्त सभी
मुक्तक छंद में क्या बंधन होता है?
a) मात्रा
b) वर्ण
c) कोई नहीं
d) यति
उत्तर: c) कोई नहीं
रोला छंद में कितनी मात्राएँ होती हैं?
a) 16
b) 24
c) 26
d) 28
उत्तर: b) 24
हरिगीतिका छंद में यति कैसे होती है?
a) 8+8
b) 12+16
c) 6+7
d) 14+14
उत्तर: b) 12+16
कवित्त छंद किस रस के लिए प्रसिद्ध है?
a) शृंगार
b) वीर
c) करुण
d) हास्य
उत्तर: b) वीर
छंद में गण क्या है?
a) लय
b) मात्राओं का समूह
c) विराम
d) तुक
उत्तर: b) मात्राओं का समूह
सोरठा छंद दोहे से कैसे अलग है?
a) मात्राएँ उल्टी
b) यति उल्टी
c) तुक उल्टी
d) गति उल्टी
उत्तर: a) मात्राएँ उल्टी
छंद प्रश्न उत्तर (Chhand Prashn Uttar)
प्रश्न 1: छंद क्या है?
उत्तर: छंद कविता की लयबद्ध व्यवस्था है जो कविता को संगीतमय बनाती है।
प्रश्न 2: छंद के मुख्य प्रकार कितने हैं?
उत्तर: तीन – मात्रिक, वर्णिक और मुक्तक।
प्रश्न 3: दोहा छंद में कितनी मात्राएँ होती हैं?
उत्तर: पहला और तीसरा चरण 13, दूसरा और चौथा 11।
प्रश्न 4: यति क्या है?
उत्तर: चरण में विराम स्थान।
प्रश्न 5: तुक क्या है?
उत्तर: चरण के अंत में समान ध्वनि।
छंद की परिभाषा लिखिए (Chhand Ki Paribhasha Likhiye)
छंद वह व्यवस्था है जिसमें कविता के चरणों में मात्रा या वर्णों की निश्चित संख्या, यति और तुक का पालन होता है।
छंद के भेद उदाहरण (Chhand Ke Bhed Udaharan)
- मात्रिक: दोहा
- वर्णिक: कवित्त
- मुक्तक: आधुनिक कविता
मात्रिक छंद के प्रकार (Matrik Chhand Ke Prakar)
मात्रिक छंद के मुख्य प्रकार हैं: दोहा, सोरठा, चौपाई, रोला, गीतिका, हरिगीतिका, उल्लाला, बरवै। ये प्रकार मात्राओं पर आधारित हैं।
वर्णिक छंद के प्रकार (Varnik Chhand Ke Prakar)
वर्णिक छंद के मुख्य प्रकार हैं: सवैया, कवित्त, हरिगीतिका, उल्लाला। ये प्रकार वर्णों की संख्या पर आधारित हैं।
दोहा छंद उदाहरण (Doha Chhand Udaharan)
दोहा छंद का उदाहरण: रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून। पानी गए न ऊबरे, मोती मानुस चून।
सोरठा छंद उदाहरण (Sortha Chhand Udaharan)
सोरठा छंद का उदाहरण: रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरो चटकाय। टूटे से फिर न जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ जाय।
चौपाई छंद उदाहरण (Chaupai Chhand Udaharan)
चौपाई छंद का उदाहरण: श्री रामचंद्र कृपालु भजमान। हरन भवभय दारुन दुख भंजन।
रोला छंद उदाहरण (Rola Chhand Udaharan)
रोला छंद का उदाहरण: सूरदास जी के पदों में प्रयोग। रोला छंद बहुत लयपूर्ण है और भक्ति काव्य में प्रसिद्ध है।
सवैया छंद उदाहरण (Savaiya Chhand Udaharan)
सवैया छंद का उदाहरण: बिहारी के सवैये प्रसिद्ध हैं। सवैया छंद वर्णिक है और भव्यता प्रदान करता है।
कवित्त छंद उदाहरण (Kavitt Chhand Udaharan)
कवित्त छंद का उदाहरण: भूषण के कवित्त वीर रस के लिए प्रसिद्ध हैं। कवित्त छंद ओजपूर्ण है और युद्ध वर्णन में इस्तेमाल होता है।
छंद और अलंकार में अंतर (Chhand Aur Alankar Mein Antar)
छंद कविता की लय और ताल देता है, जबकि अलंकार शब्दों और अर्थ की सुंदरता बढ़ाता है। छंद संरचना है, अलंकार सजावट है। छंद के बिना कविता असंगठित, अलंकार के बिना सादा लगती है।
छंद की परिभाषा और उदाहरण (Chhand Ki Paribhasha Aur Udaharan)
छंद की परिभाषा: कविता की लयबद्ध व्यवस्था। उदाहरण: दोहा। यह परिभाषा संस्कृत से ली गई है।
छंद के अंग क्या हैं (Chhand Ke Ang Kya Hain)
छंद के मुख्य अंग हैं: चरण, यति, तुक, गति और गण। ये अंग कविता की संरचना बनाते हैं। चरण पंक्ति है, यति विराम, तुक अंत की समान ध्वनि, गति लय और गण मात्राओं का समूह है।
छंद में मात्रा क्या है (Chhand Mein Matra Kya Hai)
छंद में मात्रा अक्षर की ध्वनि की लंबाई है। उदाहरण: अ = 1 मात्रा, आ = 2 मात्राएँ। मात्रा मात्रिक छंद की आधारशिला है।
छंद में वर्ण क्या है (Chhand Mein Varn Kya Hai)
छंद में वर्ण अक्षर होता है। वर्णिक छंद में वर्णों की संख्या निश्चित होती है। वर्ण छंद की गिनती का आधार है।
छंद में तुक क्या है (Chhand Mein Tuk Kya Hai)
छंद में तुक चरण के अंत में समान ध्वनि को कहते हैं। दोहे में दूसरा और चौथा चरण तुकांत होते हैं। तुक कविता को मधुर बनाती है।
छंद में यति क्या है (Chhand Mein Yati Kya Hai)
छंद में यति चरण में विराम स्थान है। दोहे में यति 6+7 और 6+5 पर होती है। यति कविता को पढ़ने में आसान बनाती है।
छंद के प्रकार की तालिका (Table of Chhand Types)
| छंद का प्रकार | मुख्य विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|
| मात्रिक छंद | मात्राओं की गिनती | दोहा, चौपाई |
| वर्णिक छंद | वर्णों की गिनती | सवैया, कवित्त |
| मुक्तक छंद | कोई बंधन नहीं | निराला की कविताएँ |
छंद का रूप निर्माण (Rup Nirman)
छंद का रूप काव्य को संगीतमय और लयबद्ध बनाता है। मात्रिक छंद में मात्राओं की गिनती, वर्णिक में अक्षरों की संख्या और मुक्त छंद में भाव की स्वतंत्रता होती है। यह रूप कविता को याद रखने में आसान और सुनने में मधुर बनाता है। कुल मिलाकर, छंद काव्य की आत्मा है।
विशेषज्ञ राय (Visheshagya Rai)
भाषाविदों के अनुसार, “छंद काव्य का वह संगीत है जो शब्दों को जीवंत बनाता है। बिना छंद के कविता सूखी लगती है।”
निष्कर्ष (Nishkarsh)
छंद हिंदी काव्य का आधार है। यह कविता को लय, ताल और संगीतमयता देता है। कक्षा स्तर पर छंद पहचानना बहुत महत्वपूर्ण है और प्रतियोगी परीक्षाओं में भी अच्छे अंक दिलाता है। रोजाना 5-10 छंदों के उदाहरण पढ़ें और उनकी मात्रा/वर्ण गिनें।
❓ FAQs:
प्रश्न : छंद किसे कहते हैं?
उत्तर: छंद वह नियम है जो कविता में लय और ताल पैदा करता है।
प्रश्न : छंद के मुख्य प्रकार कितने हैं?
उत्तर: तीन – मात्रिक, वर्णिक और मुक्त छंद।
प्रश्न : दोहा छंद में कितनी मात्राएँ होती हैं?
उत्तर: 13+11 मात्राएँ।
प्रश्न : चौपाई छंद का उदाहरण दें।
उत्तर: “मंगल भवन अमंगल हारी…” (रामचरितमानस)
प्रश्न : मुक्त छंद क्या है?
उत्तर: मुक्त छंद में कोई निश्चित मात्रा या वर्ण नियम नहीं होता।
प्रश्न : कक्षा 10 में छंद से कितने अंक आते हैं?
उत्तर: 5 से 8 अंक (छंद पहचान + उदाहरण)।
प्रश्न : परीक्षा में छंद कैसे पहचानें?
उत्तर: मात्रा या वर्ण गिनें, लय सुनें और प्रसिद्ध कवि याद रखें।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह लेख केवल शैक्षणिक उद्देश्य से तैयार किया गया है। उदाहरण सरल और सामान्य रखे गए हैं। किसी आधिकारिक पाठ्यपुस्तक का विकल्प नहीं है। पाठक अपनी जिम्मेदारी पर उपयोग करें।
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