परिचय
भाषा केवल विचार व्यक्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि वह हमारे व्यवहार, सोच और सामाजिक मर्यादाओं को भी आकार देती है। जब हम किसी कार्य को न करने, रोकने, मना करने या अस्वीकार करने की बात करते हैं, तब भाषा में एक विशेष प्रकार के वाक्य का प्रयोग होता है। ऐसे वाक्य न केवल दैनिक जीवन में, बल्कि साहित्य, व्याकरण, शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में भी अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।
जैसे —
“यहाँ शोर मत करो।”
“तुमने सच नहीं कहा।”
इन वाक्यों में किसी कार्य या भाव का निषेध किया गया है। यही वाक्य निषेधवाचक वाक्य कहलाते हैं।
Nishedh Vachak Vakya Ki Paribhasha
परिभाषा:
जिस वाक्य में किसी कार्य, घटना, स्थिति या भाव के न होने, न करने या रोक का बोध हो, उसे निषेधवाचक वाक्य कहते हैं।
सरल शब्दों में:
जब वाक्य में “न”, “नहीं”, “मत”, “कभी नहीं”, “बिल्कुल नहीं” जैसे शब्दों द्वारा किसी बात का इंकार या मनाही की जाए, तो वह निषेधवाचक वाक्य होता है।
उदाहरण:
-
वह आज विद्यालय नहीं आया।
-
बच्चों, यहाँ दौड़ो मत।
-
मैं यह काम न कर सका।
संरचना / रूप-रचना
निषेधवाचक वाक्य की संरचना बहुत सरल होती है, लेकिन उसका प्रभाव बहुत स्पष्ट होता है।
संरचनात्मक तत्व
| घटक | विवरण |
|---|---|
| कर्ता | जिसके बारे में बात की जा रही हो |
| क्रिया | कार्य या अवस्था |
| निषेध सूचक शब्द | न, नहीं, मत, कभी नहीं आदि |
| वाक्य-भाव | रोक, अस्वीकृति या इंकार |
सामान्य संरचना
कर्ता + निषेध शब्द + क्रिया
उदाहरण:
-
राम + नहीं + गया
-
तुम + मत + बोलो
निषेधवाचक वाक्य के प्रकार (Nishedh Vachak Vakya ke Prakar)
1. साधारण निषेधवाचक वाक्य (Sadharan Nishedh Vachak Vakya)
जिसमें किसी कार्य के न होने की सामान्य सूचना दी जाए।
उदाहरण:
-
वह मुझे पहचानता नहीं है।
2. आज्ञासूचक निषेधवाचक वाक्य (Agyasoochak Nishedh Vachak Vakya)
जिसमें किसी को आदेश के रूप में मना किया जाए।
उदाहरण:
-
यहाँ प्रवेश मत करो।
3. भावात्मक निषेधवाचक वाक्य (Bhavatmak Nishedh Vachak Vakya)
जिसमें भावना या मानसिक स्थिति का निषेध हो।
उदाहरण:
-
मुझे इस बात का दुख नहीं है।
4. पूर्ण निषेधवाचक वाक्य (Purn Nishedh Vachak Vakya)
जिसमें किसी संभावना का पूरी तरह से खंडन हो।
उदाहरण:
-
यह कार्य कभी नहीं हो सकता।
निषेधवाचक वाक्य पहचानने के नियम (Nishedh Vachak Vakya Pehchanne Ke Niyam)
नियम 1: निषेध सूचक शब्दों की उपस्थिति
यदि किसी वाक्य में “न”, “नहीं”, “मत”, “कभी नहीं”, “बिल्कुल नहीं” जैसे शब्द हों, तो वह वाक्य प्रायः निषेधवाचक होता है।
उदाहरण:
-
वह आज विद्यालय नहीं गया।
-
यहाँ शोर मत करो।
यहाँ “नहीं” और “मत” निषेध का बोध करा रहे हैं।
नियम 2: क्रिया के निषेध का भाव
यदि वाक्य में बताई गई क्रिया घटित नहीं हो रही या उसे रोका जा रहा है, तो वह निषेधवाचक वाक्य होता है।
उदाहरण:
-
मैं यह काम न कर सका।
-
उसने मेरी बात नहीं मानी।
यहाँ क्रिया का इंकार हो रहा है।
नियम 3: आदेश या मनाही का भाव
जब किसी वाक्य में आदेश के रूप में किसी कार्य को न करने के लिए कहा जाए, तो वह निषेधवाचक वाक्य कहलाता है। इसमें प्रायः “मत” शब्द का प्रयोग होता है।
उदाहरण:
-
बच्चे, सड़क पर मत खेलो।
-
बिना अनुमति अंदर मत आना।
यह आदेशात्मक निषेध है।
नियम 4: पूर्ण या दृढ़ निषेध
यदि वाक्य में किसी कार्य या संभावना का पूरी तरह खंडन किया गया हो, तो वह निषेधवाचक वाक्य होता है। इसमें “कभी नहीं”, “बिल्कुल नहीं” जैसे शब्द आते हैं।
उदाहरण:
-
यह कार्य कभी नहीं हो सकता।
-
वह बात बिल्कुल नहीं मानेगा।
नियम 5: सकारात्मक वाक्य से उलट अर्थ
यदि किसी वाक्य को सकारात्मक (स्वीकारात्मक) में बदलने पर उसका अर्थ उलट जाए, तो वह वाक्य निषेधवाचक होता है।
उदाहरण:
-
वह ईमानदार है। (सकारात्मक)
-
वह ईमानदार नहीं है। (निषेधवाचक)
नियम 6: प्रश्नवाचक वाक्य से अंतर समझें
यदि वाक्य प्रश्न पूछ रहा हो, भले ही उसमें “नहीं” शब्द हो, तब वह निषेधवाचक नहीं माना जाएगा।
उदाहरण:
-
क्या वह आज नहीं आएगा?
(यह प्रश्नवाचक है, निषेधवाचक नहीं)
नियम 7: भाव या स्थिति का निषेध
जब वाक्य में किसी भाव, अनुभव या स्थिति के अभाव का बोध हो, तब भी वह निषेधवाचक होता है।
उदाहरण:
-
मुझे इस बात का दुख नहीं है।
-
उसे किसी से डर नहीं लगता।
निषेधवाचक वाक्य के 20 उदाहरण (Nishedh Vachak Vakya Ke 20 Udaharan)
| क्रम संख्या | निषेधवाचक वाक्य (Nishedh Vachak Vakya) | निषेध सूचक शब्द |
|---|---|---|
| 1 | वह आज विद्यालय नहीं आया। | नहीं |
| 2 | मुझे झूठ बोलना पसंद नहीं है। | नहीं |
| 3 | यहाँ शोर मत करो। | मत |
| 4 | उसने मेरी बात नहीं मानी। | नहीं |
| 5 | मैं यह काम अब नहीं करूँगा। | नहीं |
| 6 | बिना अनुमति अंदर मत आना। | मत |
| 7 | मुझे किसी से डर नहीं लगता। | नहीं |
| 8 | बच्चे सड़क पर मत खेलो। | मत |
| 9 | यह नियम तोड़ा नहीं जा सकता। | नहीं |
| 10 | वह समय पर कभी नहीं आता। | कभी नहीं |
| 11 | हमें दूसरों का अपमान नहीं करना चाहिए। | नहीं |
| 12 | तुम आज बाहर मत जाओ। | मत |
| 13 | यह रास्ता सुरक्षित नहीं है। | नहीं |
| 14 | मैं यह गलती दोबारा नहीं करूँगा। | नहीं |
| 15 | उसे इस विषय का ज्ञान नहीं है। | नहीं |
| 16 | यहाँ गाड़ी खड़ी मत करो। | मत |
| 17 | वह अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा सका। | नहीं |
| 18 | हमें समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। | नहीं |
| 19 | इस कमरे में प्रवेश मत करो। | मत |
| 20 | बिना मेहनत के सफलता नहीं मिलती। | नहीं |
निषेधवाचक वाक्य के रूप निर्माण (Nishedh Vachak Vakya ke Rup Nirman)
1. “नहीं” लगाकर
सकारात्मक वाक्य की क्रिया से पहले “नहीं” लगाया जाता है।
वह पढ़ता है → वह नहीं पढ़ता है।
2. “मत” लगाकर (आदेश में)
आदेशात्मक वाक्य में “मत” का प्रयोग होता है।
शोर करो → शोर मत करो।
3. काल के अनुसार प्रयोग
-
भूतकाल → वह नहीं गया।
-
वर्तमान काल → वह नहीं जाता है।
-
भविष्य काल → वह नहीं जाएगा।
4. पूर्ण निषेध के लिए
“कभी नहीं”, “बिल्कुल नहीं” का प्रयोग।
यह काम कभी नहीं होगा।
विशेषज्ञ राय
हिंदी व्याकरण के विद्वानों के अनुसार निषेधवाचक वाक्य (Nishedh Vachak Vakya) भाषा को संतुलन प्रदान करते हैं। इनके बिना न तो अनुशासन संभव है और न ही स्पष्ट संवाद। परीक्षा की दृष्टि से भी यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
निषेधवाचक वाक्य (Nishedh Vachak Vakya) हिंदी व्याकरण का एक आवश्यक और व्यावहारिक अंग हैं। इनके माध्यम से हम किसी कार्य का निषेध, रोक या अस्वीकृति स्पष्ट रूप से व्यक्त कर सकते हैं। विद्यार्थी यदि इसकी संरचना, पहचान और प्रयोग को समझ लें, तो वे न केवल परीक्षाओं में सफल होंगे, बल्कि भाषा के सही प्रयोग में भी निपुण बनेंगे।
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प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1: निषेधवाचक वाक्य क्या होता है?
उत्तर: जिस वाक्य में किसी कार्य के न होने या मना करने का भाव हो।
प्रश्न 2: निषेधवाचक वाक्य में कौन से शब्द आते हैं?
उत्तर: न, नहीं, मत, कभी नहीं आदि।
प्रश्न 3: क्या आदेशात्मक वाक्य निषेधवाचक हो सकता है?
उत्तर: हाँ, जब उसमें “मत” का प्रयोग हो।
प्रश्न 4: क्या यह प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछा जाता है?
उत्तर: हाँ, बहुत बार पूछा जाता है।
प्रश्न 5: निषेधवाचक और सकारात्मक वाक्य में अंतर क्या है?
उत्तर: एक में इंकार होता है, दूसरे में स्वीकृति।
डिस्क्लेमर
यह लेख शैक्षणिक उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी हिंदी व्याकरण की सामान्य समझ पर आधारित है और छात्रों की सहायता के लिए सरल भाषा में प्रस्तुत की गई है
