परिचय
हिंदी साहित्य में जब भी कविता, गीत, भजन या दोहे की बात होती है, तो उसके पीछे एक निश्चित लय, ताल और अनुशासन छिपा होता है। यही अनुशासन छंद कहलाता है।
Chhand कविता को न केवल सुंदर बनाता है, बल्कि उसे गायन योग्य, स्मरणीय और प्रभावशाली भी बनाता है।
प्राचीन काल से लेकर आधुनिक समय तक छंदों का प्रयोग भक्ति काव्य, रीतिकालीन काव्य, लोकगीतों और पाठ्यपुस्तकों में लगातार होता आ रहा है।
इसी कारण छंद का ज्ञान छात्रों, शिक्षकों और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत आवश्यक है।
छंद की परिभाषा (Chhand Ki Paribhasha)
छंद वह काव्य-रचना है जिसमें
वर्णों या मात्राओं की संख्या,
यति,
लय
और
ताल
निश्चित नियमों के अनुसार व्यवस्थित होती है।
सरल शब्दों में:
जिस कविता को एक निश्चित लय में पढ़ा या गाया जा सके, वह छंद (Chhand) कहलाती है।
संरचना / छंद-विधान / रूप-रचना
छंद की संरचना मुख्यतः निम्न तत्वों पर आधारित होती है:
छंद-विधान के प्रमुख तत्व
| तत्व | विवरण |
|---|---|
| वर्ण | अक्षरों की गणना |
| मात्रा | ह्रस्व (1) और दीर्घ (2) |
| पंक्ति | छंद की पंक्तियाँ |
| यति | रुकने का स्थान |
| लय | पढ़ने की गति |
छंद की आधारभूत संरचना
-
निश्चित पंक्तियाँ
-
प्रत्येक पंक्ति में निश्चित वर्ण/मात्रा
-
समान लय और ताल
छंद के प्रकार (Chhand Ke Prakar)
छंद को मुख्य रूप से तीन वर्गों में बाँटा जाता है:
वर्णिक छंद (Varnik Chhand)
परिभाषा:
जिस छंद में प्रत्येक पंक्ति में वर्णों (अक्षरों) की संख्या निश्चित होती है, उसे वर्णिक छंद कहते हैं।
इसमें मात्रा की गिनती नहीं, बल्कि अक्षरों की गिनती की जाती है।
मुख्य विशेषताएँ:
-
वर्णों की संख्या तय होती है
-
लय और ताल निश्चित होती है
-
प्राचीन और मध्यकालीन काव्य में अधिक प्रयोग
-
गेयता (गाने योग्य) अधिक होती है
उदाहरण:
-
दोहा – 13-11 वर्ण
-
चौपाई – प्रत्येक पंक्ति में 16 वर्ण
-
सोरठा – 11-13 वर्ण (दोहा का उलटा रूप)
परीक्षा ट्रिक:
जहाँ “वर्ण गिनने” की बात हो → वर्णिक छंद
मात्रिक छंद (Matrik Chhand)
परिभाषा:
जिस छंद में ह्रस्व (1 मात्रा) और दीर्घ (2 मात्रा) के आधार पर मात्राओं की गणना की जाती है, उसे मात्रिक छंद कहते हैं।
मुख्य विशेषताएँ:
-
मात्रा गिनी जाती है, वर्ण नहीं
-
पढ़ने में अधिक लयात्मक
-
लोकगीतों और गीतात्मक कविताओं में प्रयोग
-
भावों की अभिव्यक्ति अधिक सहज
उदाहरण:
-
रोला
-
हरिगीतिका
परीक्षा ट्रिक:
जहाँ “मात्रा” शब्द दिखे → मात्रिक छंद
मुक्त छंद (Mukt Chhand)
परिभाषा:
जिस छंद में वर्ण, मात्रा, यति या लय का कोई निश्चित नियम नहीं होता, उसे मुक्त छंद कहते हैं।
मुख्य विशेषताएँ:
-
नियमों से मुक्त
-
भाव प्रधान
-
आधुनिक हिंदी कविता में अधिक प्रचलित
-
कवि को पूर्ण स्वतंत्रता
प्रयोग क्षेत्र:
-
आधुनिक कविता
-
नई संवेदना और विचारधारा
-
सामाजिक और व्यक्तिगत भाव
उदाहरण:
-
आधुनिक कवियों की अधिकांश कविताएँ
परीक्षा ट्रिक:
जहाँ “नियम नहीं” लिखा हो → मुक्त छंद
तीनों छंदों का संक्षिप्त अंतर
| छंद का प्रकार | आधार | उदाहरण |
|---|---|---|
| वर्णिक छंद | वर्ण संख्या | दोहा, चौपाई, सोरठा |
| मात्रिक छंद | मात्रा गणना | रोला, हरिगीतिका |
| मुक्त छंद | कोई नियम नहीं | आधुनिक कविता |
छंद पहचानने के नियम (Chhand Pehchanne Ke Niyam)
वर्णों की संख्या जाँचें
सबसे पहला और महत्वपूर्ण नियम है —
प्रत्येक पंक्ति में वर्ण (अक्षर) गिनना।
-
यदि हर पंक्ति में वर्णों की संख्या निश्चित हो
→ वह वर्णिक छंद है।
उदाहरण:
-
दोहा – 13-11 वर्ण
-
चौपाई – 16-16 वर्ण
-
सोरठा – 11-13 वर्ण
मात्राओं की गणना करें
यदि कविता में
-
ह्रस्व मात्रा = 1
-
दीर्घ मात्रा = 2
के आधार पर मात्राओं की गणना हो रही हो,
तो वह मात्रिक छंद होता है।
उदाहरण:
-
रोला
-
हरिगीतिका
पंक्तियों की संख्या देखें
छंद की पहचान में पंक्तियों की संख्या भी सहायक होती है:
-
2 पंक्तियाँ → दोहा
-
4 पंक्तियाँ → चौपाई / सोरठा
हालाँकि यह नियम सहायक है, अंतिम नहीं।
लय और ताल पर ध्यान दें
छंद की सबसे बड़ी पहचान उसकी लय होती है।
-
पढ़ते समय यदि कविता
-
तालबद्ध लगे
-
गाने योग्य हो
-
समान गति से बहे
-
तो वह निश्चित रूप से किसी न किसी छंद में है।
दोहा और सोरठा को अलग पहचानें
यह बहुत महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु है:
| छंद | वर्ण क्रम |
|---|---|
| दोहा | 13–11 |
| सोरठा | 11–13 |
यति (रुकने का स्थान) देखें
छंद में अक्सर निश्चित स्थान पर विराम आता है, जिसे यति कहते हैं।
-
जहाँ पढ़ते समय अपने आप रुकने का मन करे
-
वही यति का स्थान होता है
यति की उपस्थिति छंद की पुष्टि करती है।
यदि कोई नियम न मिले तो मुक्त छंद
यदि कविता में:
-
न वर्ण निश्चित हों
-
न मात्रा निश्चित हो
-
न लय बंधी हो
तो वह मुक्त छंद कहलाती है।
उदाहरण:
अधिकांश आधुनिक कविताएँ
परीक्षा ट्रिक:
“नियम नहीं — मुक्त छंद सही”
भाषा और शैली पर ध्यान दें
-
लोकगीत, भजन → प्रायः वर्णिक/मात्रिक
-
आधुनिक भाव, सामाजिक विषय → मुक्त छंद
यह नियम सहायक है, अनिवार्य नहीं।
छंद पहचानने की सुपर ट्रिक
| संकेत | छंद |
|---|---|
| वर्ण गिनने पड़ें | वर्णिक |
| मात्रा गिननी पड़े | मात्रिक |
| कुछ भी तय न हो | मुक्त |
छंद की विशेष लक्षण / विशेषताएँ
-
निश्चित नियमों पर आधारित
-
लयात्मक और संगीतात्मक
-
याद रखने में सरल
-
भावों को प्रभावी बनाता है
-
लोक और शास्त्रीय परंपरा से जुड़ा
-
परीक्षा में अंक दिलाने वाला विषय
छंद के 20 उदाहरण (Chhand Ke 20 Udaharan)
- सत्य मार्ग पर जो चला, कभी न हो निराश।
कठिन समय में भी सदा, देता धैर्य प्रकाश॥ - मेहनत से जो डर गया, उसका सपना टूट।
परिश्रम करता जो सदा, पाता जीवन छूट॥ - जैसी करनी वैसी भरनी, यह जग का है न्याय।
बीज जो जैसा बोएगा, वैसा फल ही पाय॥ - क्रोध मनुज का शत्रु है, लोभ करे विनाश।
संयम से ही जीवन में, मिलता सुख उजास॥ - वाणी मीठी बोलिए, कटु न हो व्यवहार।
मीठे बोलों से सदा, बनते सब परिवार॥ - समय बड़ा बलवान है, कोई न सके रोक।
जो इसका सदुपयोग करे, मिटे जीवन शोक॥ - ज्ञान बिना अंधकार है, शिक्षा दीप समान।
जिसके मन में ज्ञान हो, वही सच्चा इंसान॥ - माता-पिता का मान रख, यही धर्म महान।
इनके चरणों में सदा, बसता है भगवान॥ - आशा का दीप जलाए रख, मत होने दे क्षीण।
अंधियारे जीवन पथ में, यही बने नवीन॥ - लोभ बुरा है जीवन में, त्याग बने आधार।
संतोषी मन में सदा, बसता सुख अपार॥ - कर्म किए जा निष्कपट, फल की चिंता छोड़।
मेहनत का हर बीज ही, लाता खुशियों मोड़॥ - दुख-सुख जीवन के रंग, आते जाते साथ।
जो धैर्य से जीना सीखे, वही बने परख॥ - संगति का ही असर है, जैसा संग वैसा रंग।
सज्जन संग से निखरे, दुर्जन से हो भंग॥ - सत्य वचन की राह पर, चलना नहीं कठिन।
मन में साहस जो रखे, वही बने नवीन॥ - प्रेम बिना यह जग सूना, भाव बिना हर गीत।
प्रीति से ही बन सके, जीवन की हर रीत॥ - अहंकार का भार जो, सिर पर ढोए नित्य।
ज्ञान के अभाव में, होता उसका क्षय निश्चित॥ - क्षमा वीर की पहचान, दुर्बल का न काम।
जो क्षमा को अपनाए, वही बने महान॥ - सेवा से ही मिलता है, मन का सच्चा सार।
निस्वार्थ भाव से सदा, मिटता जीवन भार॥ - मन को जीतो सबसे पहले, जग जीतो बाद।
आत्मबल से ही सदा, मिलता है सम्मान॥ - सत्पथ पर जो चल पड़ा, भय उससे दूर।
साहस, श्रम और सत्य से, होता जीवन पूर्ण॥
छंद का रूप निर्माण (Chhand Ka Rup Nirman)
1. भाव का चयन
छंद निर्माण की पहली अवस्था भाव चयन है।
कवि सबसे पहले यह तय करता है कि कविता किस विषय पर होगी, जैसे:
-
भक्ति
-
नीति
-
प्रेम
-
वीरता
-
जीवन दर्शन
भाव स्पष्ट होगा तो छंद प्रभावी बनेगा।
2. छंद के प्रकार का चयन
भाव के अनुसार कवि छंद का चयन करता है:
-
सरल और लोकभाव → दोहा, चौपाई
-
गेय और लयात्मक → मात्रिक छंद
-
आधुनिक विचार → मुक्त छंद
भाव के अनुसार छंद चुनना ही सफल रूप निर्माण की कुंजी है।
3. वर्ण या मात्रा निर्धारण
अब कवि यह तय करता है कि:
-
वर्णिक छंद में वर्णों की संख्या कितनी होगी
-
मात्रिक छंद में मात्राओं की गणना कैसे होगी
उदाहरण:
-
दोहा → 13–11 वर्ण
-
चौपाई → 16–16 वर्ण
यही छंद का ढांचा (Framework) बनाता है।
4. पंक्ति और यति का निर्धारण
छंद की प्रत्येक पंक्ति में:
-
यति (रुकने का स्थान) तय होती है
-
पढ़ते समय लय बनी रहती है
यति छंद को संगीतात्मक बनाती है।
5. शब्द-चयन और भाषा शैली
छंद रूप निर्माण में भाषा का विशेष महत्व होता है:
-
सरल और प्रवाहपूर्ण शब्द
-
लोक-प्रचलित भाषा
-
अनावश्यक कठिन शब्दों से बचाव
छंद जितना सरल होगा, उतना ही प्रभावी होगा।
6. लय और ताल का संतुलन
छंद की आत्मा उसकी लय होती है।
यदि लय सही न हो, तो छंद टूट जाता है।
-
समान गति
-
संतुलित उच्चारण
-
गेयता
इनसे छंद पूर्ण बनता है।
7. भाव और छंद का सामंजस्य
अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण है:
-
भाव और छंद में तालमेल
यदि भाव गंभीर है → छंद भी गंभीर हो
यदि भाव सरल है → छंद भी सहज हो
यही छंद को सजीव बनाता है।
विशेषज्ञ राय
“छंद हिंदी काव्य की आत्मा है। इसके बिना कविता दिशाहीन हो जाती है। Chhand छात्रों को अनुशासन, लय और भाषा की सुंदरता सिखाता है।”
निष्कर्ष
छंद (Chhand) केवल कविता की तकनीक नहीं, बल्कि भावों को सुंदर रूप देने का माध्यम है।
इसकी लय, सरलता और गेयता इसे आज भी प्रासंगिक बनाती है।
छात्रों के लिए यह विषय अंक दिलाने वाला और साहित्य प्रेमियों के लिए आनंद देने वाला है।
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सामान्य प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1: छंद क्या है?
उत्तर: निश्चित नियमों में बंधी कविता को छंद कहते हैं।
प्रश्न 2: छंद के कितने प्रकार हैं?
उत्तर: मुख्यतः तीन – वर्णिक, मात्रिक और मुक्त छंद।
प्रश्न 3: क्या छंद प्रतियोगी परीक्षाओं में आता है?
उत्तर: हाँ, CTET, TGT, PGT, NET में।
प्रश्न 4: दोहा किस छंद का उदाहरण है?
उत्तर: वर्णिक छंद।
प्रश्न 5: मुक्त छंद क्या है?
उत्तर: जिसमें कोई निश्चित नियम नहीं होता।
डिस्क्लेमर
यह लेख शैक्षणिक उद्देश्य से तैयार किया गया है।
उदाहरण और व्याख्या छात्रों की सुविधा के अनुसार सरल की गई है।
यह किसी मूल साहित्यिक ग्रंथ का विकल्प नहीं है।
