परिचय
कल्पना कीजिए कि आप किसी मंच पर बैठे हैं और कवि जोश में आकर ऐसी पंक्तियाँ पढ़ते हैं जिनकी ताल, लय और शब्दों का कंपन आपके मन को झंकृत कर देता है। हिंदी काव्य में कई छंद इसी प्रभाव को जन्म देते हैं—और उन्हीं में एक chhappay chhand भी है।
यह छंद अपनी सहजता, गेयता और मुखर प्रस्तुति के कारण लोकगीतों, गीतिकाव्य और भक्ति साहित्य में सदियों से उपयोग होता आया है। यह छंद छात्रों, कवियों और मंचीय कलाकारों के अध्ययन का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।
Chhappay Chhand Ki Paribhasha
छप्पय छंद वह परंपरागत हिंदी काव्य-छंद है जिसमें हर चरण (लाइन) एक निश्चित मात्रा-पद्धति, लय और गति का पालन करता है। यह मुख्यतः गाथा-शैली और लोकगीत-शैली में प्रयुक्त होता है।
इसमें शब्दों का प्रवाह ऐसा होता है कि पाठक स्वाभाविक रूप से गुनगुनाने लग जाता है।
टेबल:
| बिंदु | विवरण |
| छंद का नाम | छप्पय छंद |
| प्रकृति | गेय, लयबद्ध, तेज-ताल वाला |
| उपयोग | लोकगीत, वीर-गाथा, भक्ति, मंचीय काव्य |
| संरचना | निश्चित मात्रा, गिनती और यति |
छप्पय छंद के प्रकार (Chhappay Chhand Ke Prakar)
टेबल:
| प्रकार | विशेषता |
| परंपरागत छप्पय | शास्त्रीय मात्रा-संरचना पर आधारित |
| लोक-छप्पय | स्थानीय गीत-लय के अनुसार परिवर्तित |
| गीत-छप्पय | संगीत/भजन शैली में प्रयुक्त |
| मंचीय छप्पय | कविता-पाठ और कवि-सम्मेलन के अनुकूल |
छप्पय छंद पहचानने के नियम (Chhappay Chhand Pehchanne Ke Niyam)
1. लय तेज और गेय होती है
Chhappay Chhand की सबसे बड़ी पहचान इसकी तेज़, झंकार वाली और गुनगुनाने योग्य लय है।
इसे पढ़ते या सुनते समय ऐसा लगता है जैसे कोई लोकगीत या भजन चल रहा हो।
➡ यह छंद गाया जा सकता है — सिर्फ पढ़ा नहीं जाता।
➡ इसकी लय आपको अपने आप “ताल पकड़ने” पर मजबूर करती है।
2. प्रत्येक पंक्ति में निश्चित मात्रा-संरचना होती है
हालाँकि स्कूलों में हर मात्रा का नियम बहुत गहराई से नहीं पढ़ाया जाता, पर Chhappay Chhand की हर पंक्ति लगभग समान मात्रा से बनती है।
➡ इसका मतलब:
हर लाइन लगभग बराबर लंबाई की, संतुलित और छंदानुकूल होती है।
3. शब्दों का प्रवाह सहज और तेज
Chhappay Chhand में शब्द बीच में अटकते नहीं।
उनका प्रवाह ऐसा रहता है जैसे कोई द्रुत गति का गीत चल रहा हो।
➡ पंक्तियाँ पढ़ते समय रुकावट बहुत कम होती है।
➡ शब्दों में “कटाव” कम और “प्रवाह” ज़्यादा मिलता है।
4. लोकगीत जैसी ध्वनि
यह अक्सर लोकगीत, भजन, गाथा, वीर-गीत आदि में उपयोग होता है। इसलिए इसकी पहचान यह भी है:
➡ पंक्तियाँ लोक-भाषा या सामान्य बोलचाल जैसी लगती हैं।
➡ शब्दों में अक्सर ध्वनि-आधारित आकर्षण होता है (जैसे: छन-छन, झन-झन आदि)।
5. चरण में समानता
इस छंद की हर पंक्ति एक “pattern” में चलती है:
- पंक्तियों की लंबाई लगभग बराबर
- लय में दोहराव
- यति (pause) का स्थिर स्थान
- अंत में ताल बरकरार रहती है
➡ इस संतुलन को सुनते ही पहचान हो जाती है कि यह Chhappay Chhand है।
6. पंक्ति पढ़ते समय आपको ‘ताल’ महसूस हो जाती है
अगर किसी छंद को पढ़ते ही आपके पैर ताल में थिरकने लगें—
बहुत संभावना है कि वह Chhappay Chhand हो।
➡ यह छंद भावनात्मक और मंचीय दोनों होता है।
➡ पढ़ने पर गीत जैसा एहसास आता है।
7. मंचीय कवियों का पसंदीदा छंद
कवि-सम्मेलनों में यह छंद तेज़, जोशपूर्ण प्रस्तुति के लिए प्रयोग होता है।
इसलिए:
➡ इसकी प्रस्तुति ऊर्जावान होती है
➡ लय का उठान स्पष्ट होता है
छप्पय छंद के 25 उदाहरण (Chhappay Chhand Ke 25 Udaharan)
- मन में जब अज्ञान, बढ़े अहंकार की ज्वाला |
तब उजड़ते काम, न बचे कोई भी भाला ||
जो सीखे विनय का पाठ, वही जीवन में खिलता |
दंभ का भारी बोझ, गिराकर ही मन मिलता || - जो करता मतभेद, सत्य की राह से हटकर |
भटक जाता पथ से, गिरता अपनी ही लपट पर ||
समझे जो विवेक का मोल, वही आगे बढ़ जाता |
क्रोध का गरल घोल, स्वयं जीवन को डस जाता || - अरमानों की भीड़, मन में जब कोलाहल ला दे |
भटके मानव चित्त, और दिशा से दूर भगा दे ||
शांत बने जो हृदय, वही पाता सुख अपार |
जो भीतर का शोर मिटाए, वही जीवन का सार || - कर्मों में आलस्य, कहीं भी सम्मान न देता |
तज दे जो प्रमाद, वही आगे बढ़ कर लेता ||
जीवन के हर पथ पर, पुरुषार्थ ही संग चलता |
भाग्य के बहाने छोड़, वही असली सुख फलता || - जो बोले कटु वचन, उसे मिलता वैसा ही फल |
मन की अशांति बढ़े, दुखी रहता हर पल ||
मृदु भाषा का दीप, अंधेरे मन को हरता |
मधुर वाणी का रंग, हर रिश्ते को निखरता || - जो करता परिश्रम, उसे मिलता हर वरदान |
संकल्पों की जीत, जग में करती पहचान ||
जो डरकर झुक जाए, वह पीछे ही रह जाता |
हिम्मत का दीपक ही, जीवन पथ को जगमगाता || - जो पाले ईर्ष्या, उसे चैन कभी न मिलता |
मन का अंधकार, हर सुख की कली को छिलता ||
दया और सद्भाव से, मन का बाग़ महक जाता |
स्वच्छ भाव के फूलों से, जीवन नव मुस्काता || - जो करता छल-कपट, अंत में पछताता भारी |
झूठ की नाव डूबे, चाहे हो कितनी प्यारी ||
सत्य का जो दीप जले, उसकी राह उजियारी |
नीतिवान के चरणों में ही मिलती जीवन-वारी || - जो रखे संयम, वह दुख में भी मुस्काए |
त्याग और धैर्य से ही, मन सच्चा सुख पाए ||
लालच का अंधकार, जीवन को निचोड़ देता |
संतोष की ठंडी छाँव, मन को हरा-भरा करता || - जो भटके स्वार्थ में, वह मित्रों से दूर चलता |
एकाकी हो अंत में, पछतावे का बोझ पलता ||
सेवा की राह चुने, तो सुख अपने पास बुलाता |
प्यार का स्पर्श लिए, हर संबंध सध जाता || - क्रोध में अंधा मन, सत्य-पथ को भूल जाता |
बोलों की आंधी से, रिश्तों को धूल बनाता ||
क्षमा का निर्मल जल, मन को शांत बना देता |
मैत्री की सौंधी गंध, जीवन पथ महका देता || - अति अभिमान से बढ़ता, दुर्भावों का अंधेरा |
जो नम्र बने सदा, वही जग में चाँद-सवेरा ||
नरमी का मृदु स्पर्श, रिश्तों को सही दिशा देता |
तूफानों के बीच भी, जीवन को दृढ़ बना देता || - जो हार से डरता, वह जीत न पा सकेगा |
सपनों की नाव बिना, साहस के न चल सकेगा ||
अडिग जो रहता मन, वही लक्ष्य को पा जाता |
हिम्मत के पंखों से, हर बाधा को हर आता || - जो धन को देव समझे, वह सच्चा सुख न पाए |
ममता का क्षणिक सुख, उसकी आँखों से रह जाए ||
जो प्रेम और त्याग से, जीवन को सींचे रोज़ |
वही उगते सूरज सा, चमके आनंद संजोए || - जो मन में संदेह रखे, वह निर्णय सही न ले पाए |
हर मोड़ पर झिझककर, अपने कदम डगमगाए ||
विश्वास का दीप टिमटिमाए, तो राहें स्वच्छ हो जातीं |
दृढ़ता का संबल लेकर, मंज़िलें आसान हो जातीं || - कर्महीन मनुष्य, दुनिया में सम्मान न पाता |
जो अपने श्रम से लड़े, वही ऊँचाइयाँ छू जाता ||
जीवन का सत्य यही, प्रयास ही रंग लाता |
भाग्य नहीं मेहनत ही, सफलता का फल देता जाता || - झूठ की चादर ओढ़े, कब तक जीवन कटता |
मंच पर सत्य उजाले की तरह अचानक फटता ||
सच बोलो निर्भय हो, यही जीवन की थाती |
सत्य की नाव बड़ी, हर तूफ़ान में रहती तैरती || - दोष-दर्शन की आदत, मन को दूषित कर जाती |
अपने भीतर झाँके जो, वही सच्ची बुद्धि पाती ||
आत्म-परिक्षण ही मनुष्य को, श्रेष्ठ मार्ग दिखाता |
स्वच्छ विचारों में ही, जीवन-सुख मुस्काता || - जो हर बात में रोष करे, वह मित्रों से दूर हो जाए |
संबंधों की डोरी, तनाव की धुन में टूट जाए ||
सहजता और धैर्य से, हर विवाद सुलझ जाता |
शांति का हल्का स्पर्श, मन में प्रेम खिला जाता || - काम में टालमटोल से, अवसर हाथ से खो जाए |
समय की कीमत समझे, वही लक्ष्य तक पहुँच पाए ||
क्षण-क्षण का सदुपयोग, जीवन का वरदान है |
परिश्रम का हर बूँद, सफलता का प्रमाण है || - दंभ में भरा मानव, सत्य से मुँह मोड़ लेता |
अपनी ही छाया से, दुश्मनी वो जोड़ लेता ||
विनम्रता के दीप से, मन का अंधकार मिट जाता |
सरलता की राह में ही, सच्चा गौरव मिल जाता || - दुख के सागर से पार, वही तैर कर जा पाता |
जिसका मन दृढ़ संकल्प, हर आँधी से लड़ जाता ||
हिम्मत का छोटा कण भी, पर्वत-सा बल देता |
आशा की मंद हवा, जीवन-संग सहसा बहती || - जो करता दूसरों का उपहास, वह सम्मान न पाता |
व्यंग्य के शब्दों से, मनुष्य केवल दुःख कमाता ||
सहयोग की मधुर भाषा, जीवन को सुंदर करती |
मिल-जुलकर रहने से ही, दुनिया अपनी लगती || - जो परनिंदा में लगे, उसका मन शुद्ध न रहता |
बुरे विचारों से मन की, शांत धारा सूखता रहता ||
सकारात्मक मनोभाव, हर अंधकार हर जाता |
सत्कर्मों का प्रकाश, जीवन में सुख भर जाता || - जो सीखना छोड़ दे, उसका जीवन ठहर जाता |
ज्ञान के बिना मानव, हर मोड़ पर डर जाता ||
नित नये अनुभव से ही, मनुष्य महान बनता है |
सीखने की उजली रोशनी, जीवन को सदा सँवारती है ||
छप्पय छंद रूप निर्माण (Chhappay Chhand Ka Rup Nirman)
इस छंद का निर्माण कुछ मूल स्रोतों पर आधारित होता है। सरल रूप में:
- संज्ञा से
संज्ञा-आधारित शब्दों से चरण की शुरुआत और अंत में ध्वन्यात्मक मजबूती आती है।
- विशेषण से
विशेषणों का प्रयोग छंद में लय, दृश्य और भाव को समृद्ध करता है।
- क्रिया से
क्रिया शब्द छंद में गति और ताल प्रदान करते हैं।
- ध्वनि-अनुकरण
छप्पय की सबसे प्रभावशाली विशेषता — ध्वनियाँ जैसे झन-झन, छन-छन — ताल को बढ़ाती हैं।
- लोक-शब्दावली
क्योंकि यह लोकगीतों में अत्यधिक उपयोग होता है, इसलिए बोली-भाषा का उपयोग इसकी पहचान बन जाता है।
विशेषज्ञ राय
chhappay chhand हिंदी काव्य की सबसे जीवंत और गेय विधाओं में से एक है। 2025 तक भी यह छंद मंचीय काव्य, लोकगीत और शिक्षण में समान रूप से महत्वपूर्ण बना हुआ है। इसके अभ्यास से छात्रों में भाषा-ताल, मात्रा-ज्ञान और रचनात्मक अभिव्यक्ति दोनों विकसित होते हैं।”
निष्कर्ष
Chhappay Chhand (छप्पय छंद) सिर्फ एक छंद नहीं—बल्कि एक लय, एक ताल और अभिव्यक्ति का सांस्कृतिक माध्यम है। इसे समझना और अपनाना हिंदी साहित्य के अध्ययन को आनंदमय बना देता है।
यदि आप सीखना चाहते हैं कि छंद कैसे लिखा जाता है, तो chhappay chhand से बेहतर शुरुआत और कोई नहीं।
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प्रश्न-उत्तर
1. Chhappay Chhand क्या है?
यह एक पारंपरिक लयबद्ध हिंदी छंद है जो लोकगीतों और गीतिकाव्य में अत्यधिक उपयोग होता है।
2. Chhappay Chhand क्यों लोकप्रिय है?
क्योंकि इसकी लय तेज, सरल और गुनगुनाने योग्य होती है।
3. क्या यह आज भी पढ़ाया जाता है?
हाँ, 2025 तक यह स्कूल/कॉलेज पाठ्यक्रम में शामिल है।
4. क्या इसमें लिखना कठिन है?
नहीं। इसकी मात्रा-संरचना आसान है, इसलिए नए लेखक भी इसे लिख सकते हैं।
5. इसे आसानी से कैसे पहचाना जा सकता है?
यदि छंद में लोकगीत जैसी ताल और सहज लय दिखे—बहुत सम्भावना है कि वह chhappay chhand है।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी सामान्य अध्ययन के अनुसार है और किसी विशेष परीक्षा बोर्ड के अनिवार्य नियमों का प्रतिस्थापन नहीं है।
