परिचय
क्या आपने कभी सोचा है कि हम वाक्यों में “धीरे चलो”, “जल्दी बोलो”, “साफ-साफ समझाओ”, “बिना रुके आगे बढ़ो” जैसे शब्द क्यों जोड़ते हैं?
क्योंकि ऐसे शब्द बताते हैं कि काम कैसे हो रहा है — और भाषा में इसी भूमिका को कहा जाता है ritivachak kriya visheshan।
एक छोटे से उदाहरण पर ध्यान दें:
राम धीरे चलता है।
यहाँ “धीरे” शब्द चलने की रीति बताता है — यानी काम कैसे किया गया।
Ritivachak Kriya Visheshan Ki Paribhasha
| विषय | परिभाषा |
|---|---|
| Ritivachak Kriya Visheshan | वे शब्द जो यह बताते हैं कि कोई कार्य किस प्रकार, किस ढंग या किस रीति से किया गया हो, उन्हें ritivachak kriya visheshan कहते हैं। ये हमेशा क्रिया की रीति या प्रकार बताने के लिए प्रयुक्त होते हैं। |
आसान शब्दों में:
जो शब्द क्रिया के “कैसे किया?” का उत्तर दें, वे रीतिवाचक क्रिया विशेषण हैं।
उदाहरण: धीरे, जल्दी, आराम से, जोर से, चुपचाप, खुले-आम, मजबूती से, साफ-साफ आदि।
रीतिवाचक क्रिया विशेषण के प्रकार (Ritivachak Kriya Visheshan Ke Prakar)
यद्यपि हिंदी में कई तरीके से वर्गीकरण किया जा सकता है, लेकिन शिक्षण दृष्टि से इन्हें तीन मुख्य प्रकारों में रखा जाता है:
| प्रकार | विवरण | उदाहरण |
|---|---|---|
| 1. ढंग बताने वाले | कार्य कैसे हुआ — इसका विवरण देते हैं | धीरे, जल्दी, मजबूती से |
| 2. शैली/तरीका बताने वाले | कार्य की शैली या अंदाज़ प्रकट करते हैं | चुपचाप, शांति से, सुंदरता से |
| 3. अवस्था/दशा दर्शाने वाले | कार्य करते समय स्थिति कैसी थी | हँसते-हँसते, रोते-रोते, दबे-पाँव |
रीतिवाचक क्रिया विशेषण का रूप निर्माण (Ritivachak Kriya Visheshan Ka Roop Nirman)
1. विशेषण + “से” जोड़कर
धीमा → धीरे-से
साफ → साफ-साफ
कठोर → कठोरता से
2. क्रिया + “कर”, “करके” जोड़कर
सोच → सोचकर
हँस → हँसकर
दौड़ → दौड़कर
3. संज्ञा + प्रकार सूचक शब्द
शांति → शांति से
मजबूती → मजबूती से
ध्यान → ध्यान से
4. भाववाचक संज्ञा से
सावधानी → सावधानी से
सुंदरता → सुंदरता से
ईमानदारी → ईमानदारी से
विशेषज्ञ राय
यदि विद्यार्थी रीतिवाचक क्रिया विशेषण को पहचानना सीख लें, तो वाक्य-विन्यास की उनकी समझ स्वतः बढ़ जाती है। यह विषय भले सरल लगे, लेकिन लेखन और बोलचाल में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले विशेषण वर्गों में से एक है। छात्रों को मेरी सलाह है कि हर वाक्य में पहले क्रिया पहचानें, फिर पूछें — ‘कैसे?’ यही प्रश्न आपको सही रीतिवाचक क्रिया विशेषण तक पहुँचाएगा।”
निष्कर्ष
Ritivachak kriya visheshan (रीतिवाचक क्रिया विशेषण) वे शब्द हैं जो वाक्य को अधिक सजीव, स्पष्ट और अभिव्यक्तिपूर्ण बनाते हैं।
यदि आप इनका सही उपयोग सीख लें, तो हिंदी लेखन, बोलचाल और परीक्षा—हर क्षेत्र में आपकी पकड़ मजबूत होगी।
हमेशा याद रखें:
क्रिया + “कैसे” = रीतिवाचक क्रिया विशेषण
सीखते रहें, आगे बढ़ते रहें — यही भाषा की शक्ति है!
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FAQs (5 सामान्य प्रश्न-उत्तर)
Q1. रीतिवाचक क्रिया विशेषण क्या बताते हैं?
यह बताते हैं कि कोई काम कैसे किया गया है — जैसे “धीरे”, “तेजी से”, “खुशी-खुशी” आदि।
Q2. रीतिवाचक क्रिया विशेषण को पहचानने का सबसे आसान तरीका क्या है?
वाक्य में “कैसे?” पूछिए — जो शब्द उत्तर दे, वही रीतिवाचक क्रिया विशेषण होगा।
उदाहरण: “वह कैसे चलता है?” — “धीरे”, तो “धीरे” रीतिवाचक क्रिया विशेषण है।
Q3. क्या सभी “-से” पर खत्म होने वाले शब्द रीतिवाचक क्रिया विशेषण होते हैं?
नहीं, केवल वे शब्द जो क्रिया की रीति या ढंग बताएं, वही रीतिवाचक होते हैं।
उदाहरण: “घर से आना” में “से” स्थान बताता है, इसलिए यह रीतिवाचक नहीं है।
Q4. रीतिवाचक क्रिया विशेषण और कालवाचक क्रिया विशेषण में क्या अंतर है?
रीतिवाचक “कैसे” बताता है, जबकि कालवाचक “कब” बताता है।
जैसे – “वह धीरे चला” (रीतिवाचक), “वह आज आया” (कालवाचक)।
Q5. रीतिवाचक क्रिया विशेषण के बनने के सामान्य प्रत्यय कौन-से हैं?
“-से”, “-पूर्वक”, “-ही”, “-कर” आदि से ये शब्द प्रायः बनते हैं।
उदाहरण: ध्यान + पूर्वक = ध्यानपूर्वक।
Q6. क्या एक वाक्य में एक से अधिक Ritivachak Kriya Visheshan हो सकते हैं?
हाँ, जैसे — “वह धीरे-धीरे और सावधानीपूर्वक बोलता है।”
Q7. क्या रीतिवाचक क्रिया विशेषण केवल क्रिया को ही विशेष बनाते हैं?
हाँ, ये मुख्य रूप से क्रिया को विशेष बनाते हैं, पर कभी-कभी पूरा वाक्य भाव भी बदल देते हैं — जैसे “वह खुशी-खुशी चला गया।”
डिस्क्लेमर
यह लेख शिक्षण और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। सामग्री का आधार मानक हिंदी व्याकरण और 2025 तक उपलब्ध संदर्भ हैं।
