परिचय
कभी-कभी हम किसी वाक्य में दो चीज़ों के बीच “सम्बंध” बताते हैं—जैसे राम की किताब, मेरी मां, दिल्ली का मौसम।
अगर इन वाक्यों से “की/का/के” हटा दें, तो वाक्य का अर्थ अधूरा हो जाता है।
यही संबंध दिखाने वाला व्याकरणिक कारक — संबंध कारक (Sambandh Karak) — कहलाता है।
कक्षा में छात्रों को पढ़ाते समय अक्सर मैं एक उदाहरण देता हूँ:
अगर “संबंध कारक” न हो, तो भाषा में रिश्तों, स्वामित्व और जुड़ाव को बताना लगभग असंभव हो जाएगा।
इसीलिए यह हिंदी व्याकरण के सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक है।
Sambandh Karak Ki Paribhasha
| फोकस कीवर्ड | सरल परिभाषा |
|---|---|
| Sambandh Karak (संबंध कारक) | वह कारक जो किसी संज्ञा या सर्वनाम के बीच सम्बंध, स्वामित्व, जुड़ाव या परस्पर संबंध को दर्शाता है, संबंध कारक कहलाता है। |
सरल शब्दों में —
जब वाक्य में “किसका?”, “किसकी?” या “किसके?” का उत्तर मिलता है, वहाँ संबंध कारक होता है।
Sambandh Karak Ke chinh (संबंध कारक के चिह्न)
संबंध कारक मुख्यतः इन शब्दों/प्रत्ययों से पहचाना जाता है:
-
का
-
की
-
के
-
का + का (संयुक्त वाक्यों में)
-
का + में/पर आदि (कुछ विशेष प्रयोगों में)
संबंध कारक के प्रकार (Sambandh Karak Ke Prakar)
हालांकि व्याकरण में संबंध कारक के अलग-अलग “उपप्रकार” नहीं बताए जाते, पर अर्थ और प्रयोग के आधार पर इसे इस प्रकार समझा जा सकता है:
| प्रकार | क्या दर्शाता है | उदाहरण |
|---|---|---|
| स्वामित्व संबंध | किसी वस्तु का मालिक | राम की पुस्तक |
| परिवार/रिश्ता संबंध | रिश्तेदारी | मोहन का भाई |
| गुण संबंध | किसी गुण का संबंध | लड़की की सुंदरता |
| स्थान संबंध | किसी स्थान से जुड़ाव | शहर का मौसम |
| समूह संबंध | किसी समूह का हिस्सा | भारत के लोग |
संबंध कारक पहचानने के नियम (Sambandh Karak Pehchanne Ke Niyam)
संबंध कारक पहचानने का मूल सूत्र है:
जहाँ “संबंध / स्वामित्व / जुड़ाव” दिखे, वहाँ संबंध कारक (का/की/के) मौजूद होता है।
Rule 1: “किसका / किसकी / किसके” प्रश्न पूछो
यह सबसे आसान और पक्का तरीका है।
जिस शब्द से किसका/किसकी/किसके का उत्तर मिले → वही Sambandh Karak है।
उदाहरण
वाक्य: राम की किताब सुंदर है।
प्रश्न: किताब किसकी?
उत्तर: राम की
यहाँ “की” संबंध कारक है।
इसी तरह:
-
बच्चों के खिलौने
→ खिलौने किसके? → बच्चों के -
मीना की पेंसिल
→ पेंसिल किसकी? → मीना की
Rule 2: जहाँ “का / की / के” सीधे दिखाई दें
बिना ज्यादा सोच के मान लो → यह लगभग हमेशा संबंध कारक का चिह्न है।
उदाहरण
-
मोहन का घर
-
रीना की चूड़ियाँ
-
ये लड़के के दोस्त
यह सीधे-सीधे संबंध / स्वामित्व दर्शाते हैं।
Rule 3: दो संज्ञाओं या संज्ञा–सर्वनाम के बीच संबंध हो
संबंध कारक वही जगह आता है जहाँ:
-
दो संज्ञाओं के बीच संबंध बताया जाए
या -
संज्ञा और सर्वनाम के बीच संबंध बताया जाए
उदाहरण
-
सीता की पुस्तक
→ (सीता = संज्ञा) + (पुस्तक = संज्ञा) -
मेरी किताब
→ (मैं = सर्वनाम) + (किताब = संज्ञा) -
भारत का इतिहास
→ (भारत = संज्ञा) + (इतिहास = संज्ञा)
यहाँ “का/की/के/मेरी/उसका” संबंध कारक है।
Rule 4: जहाँ सर्वनाम बदल जाता है (मेरा / तेरा / उसका / उनका)
याद रखो:
सर्वनाम + का/की/के → नया रूप बनाता है
और यह हमेशा संबंध कारक होता है।
उदाहरण
-
मैं + का → मेरा
-
तुम + का → तुम्हारा
-
वह + का → उसका
-
वे + का → उनका
इसका मतलब:
“मेरा घर सुंदर है।”
→ घर किसका? → मेरा
यह भी संबंध कारक है।
Rule 5: वाक्य में “स्वामित्व” दिख रहा हो
जहाँ भी मालिक–वस्तु का संबंध दिखे → Sambandh Karak है।
उदाहरण
-
सोनू का बैग
-
कुत्ते की पूँछ
-
मंदिर का दरवाज़ा
-
बच्चों के कपड़े
Extra Trick (सबसे मज़ेदार और आसान):
“का/की/के = जोडने वाला लिंक”
अगर वाक्य में दो चीज़ों को जोड़ने के लिए का/की/के की ज़रूरत पड़ती है, तो वह संबंध कारक है।
उदाहरण:
राम…किताब
यह वाक्य बिना “की” के नहीं जुड़ सकता:
राम की किताब
इसलिए यह संबंध कारक है।
संबंध कारक के 20 उदाहरण (Sambandh Karak Ke 20 Udaharan)
-
यह राम की किताब मेज पर रखी है।
-
रानी का कमरा बहुत साफ-सुथरा है।
-
बच्चों के बैग बस में रखे हुए हैं।
-
दिल्ली का मौसम आज बदल गया है।
-
मीना की पेंसिल टूट गई।
-
शिक्षक की मेहनत का फल छात्र पाते हैं।
-
यह मेरा का नहीं, तुम्हारा काम है।
-
घर के सामने एक बड़ा पेड़ है।
-
कुत्ते की पूँछ हिल रही है।
-
दोस्त के बिना जीवन अधूरा लगता है।
-
माता की ममता दुनिया में सबसे बड़ी होती है।
-
भारत के त्योहार पूरे वर्ष मनाए जाते हैं।
-
रीना का मोबाइल खो गया।
-
नदी के किनारे बहुत शांति मिलती है।
-
राजा की सेना बहुत शक्तिशाली थी।
-
लड़की की हँसी बहुत प्यारी लगी।
-
चाचा के खेत में गेहूँ उगे हैं।
-
किताब के पन्ने पीले हो गए हैं।
-
वह मेरे का नहीं, आपके सुझाव पर चला।
-
किसान की मेहनत से हम सबको भोजन मिलता है।
संबंध कारक का रूप-निर्माण (Sambandh Karak Ka Roop Nirman)
संबंध कारक संज्ञा या सर्वनाम के साथ का/की/के जोड़कर बनता है।
यह संख्या और लिंग के अनुसार बदलता है।
1. पुल्लिंग एकवचन → “का”
राम + का → राम का घर
2. स्त्रीलिंग एकवचन → “की”
सीता + की → सीता की चूड़ियाँ
3. बहुवचन (पुल्लिंग/स्त्रीलिंग) → “के”
बच्चे + के → बच्चे के अधिकार
4. सर्वनाम के साथ
-
मैं + का → मेरा
-
तुम + का → तुम्हारा
-
वह + का → उसका
-
ये/वे + का → इनका/उनका
अर्थात संबंध कारक सर्वनाम रूप भी बदल देता है।
संबंध कारक टेबल रूप में संपूर्ण सार
| संज्ञा / सर्वनाम | संबंध कारक रूप |
|---|---|
| वह | उसका / उसकी / उसके |
| मैं | मेरा / मेरी / मेरे |
| तुम | तुम्हारा / तुम्हारी / तुम्हारे |
| यह | इसका / इसकी / इसके |
| लोग | लोगों के |
विशेषज्ञ राय
संबंध कारक उन व्याकरणिक हिस्सों में से है जिन्हें छात्र सबसे जल्दी समझ लेते हैं, क्योंकि यह रोजमर्रा की भाषा में सबसे अधिक प्रयोग होता है।
लेकिन अक्सर बच्चे “का/की/के” का सही चयन करने में गलती करते हैं।
इसे सुधारने का सबसे आसान तरीका यह है कि बच्चे रोज़मर्रा के वाक्यों में “किसका/किसकी/किसके” प्रश्न पूछकर अभ्यास करें।
निष्कर्ष
Sambandh Karak (संबंध कारक) हिंदी व्याकरण में केवल एक नियम नहीं, बल्कि वाक्य में संबंध और अर्थ जोड़ने वाला पुल है।
इससे हम वस्तुओं, व्यक्तियों, स्थानों और गुणों के बीच जुड़ाव को सहजता से व्यक्त करते हैं।
याद रखें—
“का/की/के” = संबंध
जहाँ संबंध है, वहीं Sambandh Karak है।
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FAQs (5 प्रश्न-उत्तर)
1. संबंध कारक किसे कहते हैं?
जब वाक्य में दो शब्दों के बीच स्वामित्व या संबंध दिखाया जाता है, वह संबंध कारक कहलाता है।
2. संबंध कारक के प्रमुख चिह्न कौन से हैं?
मुख्य चिह्न — का, की, के।
3. क्या संबंध कारक हमेशा “का/की/के” से ही बनता है?
अधिकतर हाँ, लेकिन सर्वनाम के साथ इसके रूप बदल जाते हैं जैसे मेरा, उसका, उनका।
4. Sambandh Karak कैसे पहचाने?
किसका/किसकी/किसके प्रश्न पूछें। उत्तर वही होगा जहाँ संबंध कारक है।
5. क्या यह व्याकरण परीक्षाओं में पूछे जाते हैं?
हाँ, लगभग हर बोर्ड परीक्षा में संबंध कारक पर कम से कम 1–2 प्रश्न आते हैं।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल शैक्षणिक और शिक्षण उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। व्याकरणिक उदाहरणों में बदलाव बोर्ड या संदर्भ पुस्तकों के अनुसार हो सकते हैं।
