परिचय
“राधा ने गेंद फेंकी।”
यहाँ गेंद वह शब्द है जिस पर राधा की क्रिया का सीधा प्रभाव पड़ रहा है। हिंदी व्याकरण में ऐसे शब्द को कर्म कहा जाता है और वाक्य में उसकी भूमिका को कहते हैं कर्म कारक।
छात्र हों, शिक्षक हों या फिर कोई भाषा-प्रेमी—कर्म कारक को समझना व्याकरण का आधार मजबूत करता है। आज के इस ब्लॉग में आपको बेहद सरल भाषा में वह सब कुछ मिलेगा, जो 2025 तक के पाठ्यक्रम और परीक्षाओं में महत्वपूर्ण है।
Karm Karak Ki Paribhasha
| विषय | परिभाषा |
|---|---|
| (कर्म कारक) | वह कारक जो वाक्य में क्रिया से सीधे प्रभावित होने वाले शब्द को दर्शाता है, उसे कर्म कारक कहते हैं। यह आमतौर पर किसे?, क्या? प्रश्नों का उत्तर देता है। |
सरल शब्दों में:
जब किसी क्रिया का असर सीधे किसी वस्तु, व्यक्ति या चीज़ पर पड़े, वह कर्म कारक कहलाता है।
कर्म कारक के प्रकार (karm karak Ke Prakar)
कर्म दो तरह का होता है:
| प्रकार | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| 1. सकर्मक कर्म | क्रिया के लिए कर्म का होना आवश्यक | राम ने भोजन खाया |
| 2. अकर्मक | क्रिया को कर्म की ज़रूरत नहीं | बच्चा रोया (यहाँ कर्म नहीं) |
ध्यान दें:
कर्म कारक हमेशा सकर्मक क्रिया में ही प्रकट होता है।
कर्म कारक पहचानने के नियम (Karm Karak Pehchanne Ke Niyam)
1. क्रिया से “क्या?” या “किसे?” पूछें
किसी भी वाक्य में सबसे आसान तरीका यही है।
क्रिया से सवाल करें—
-
क्या?
-
किसे?
जो उत्तर मिलता है, वही कर्म होता है, और वही कर्म कारक कहलाता है।
उदाहरण:
रीना ने क्या खाया? — सेब
→ “सेब” = Karm Karak
2. जिस शब्द पर क्रिया का सीधा असर पड़े = कर्म
यदि वाक्य की क्रिया सीधे किसी पर प्रभाव डाल रही है, वह शब्द कर्म है।
उदाहरण:
राम ने दरवाज़ा खोला।
→ “दरवाज़ा” क्रिया “खोलना” से सीधे प्रभावित है
→ यह Karm Karak है
3. ‘को’ लगने वाला शब्द अक्सर कर्म होता है
लेकिन अधिकतर वाक्य में को वाला शब्द कर्म ही होता है।
उदाहरण:
सीमा ने मोहन को बुलाया।
→ “मोहन को” = Karm Karak
4. सकर्मक क्रिया में कर्म आवश्यक होता है
यदि वाक्य में ऐसी क्रिया है जिसे पूरा करने के लिए “किसे? क्या?” का उत्तर चाहिए, तो वहाँ कर्म ज़रूर होगा।
सकर्मक क्रियाएँ:
खाना, पीना, बनाना, उठाना, पढ़ना, लिखना
उदाहरण:
बच्चा किताब पढ़ रहा है।
→ “किताब” = Karm Karak
5. कर्म संज्ञा या सर्वनाम दोनों हो सकता है
कई बार लोग केवल संज्ञा को ही कर्म मानते हैं, लेकिन सर्वनाम (उसको, मुझे, उसे) भी कर्म हो सकता है।
उदाहरण:
शिक्षक ने उसे बुलाया।
→ “उसे” = Karm Karak
6. वाक्य से हटाने पर अर्थ अधूरा हो जाए
यदि किसी शब्द को हटाने पर वाक्य अधूरा हो जाए, तो वह कर्म हो सकता है।
उदाहरण:
राहुल ने खाना बनाया।
अगर “खाना” हटाएँ: “राहुल ने बनाया।”
→ वाक्य अधूरा हो गया
→ “खाना” = Karm Karak
7. कर्म हमेशा क्रिया के बाद या पहले किसी भी स्थान पर हो सकता है
स्थान देखकर पहचान मत कीजिए—
कर्म आगे भी हो सकता है और बाद में भी।
उदाहरण:
गेंद उसने फेंकी।
उसने गेंद फेंकी।
→ दोनों ही मामलों में “गेंद” = Karm Karak
कर्म कारक के 20 उदाहरण (karm karak Ke 20 Udaharan)
-
रीना ने पुस्तक पढ़ी।
-
मोहन ने गेंद फेंकी।
-
शिक्षक ने छात्रों को समझाया।
-
पायल ने चाय बनाई।
-
राम ने दरवाज़ा खोला।
-
हमने फिल्म देखी।
-
बच्चे ने खिलौना तोड़ा।
-
उसने खाना खाया।
-
पापा ने कार खरीदी।
-
माँ ने चिट्ठी लिखी।
-
राहुल ने मोबाइल उठाया।
-
लड़की ने चित्र बनाया।
-
सोनू ने किताब ढूँढी।
-
गीता ने गाना गाया।
-
बबलू ने कमीज़ पहनी।
-
कुत्ते ने हड्डी चबाई।
-
दुकानदार ने सामान दिया।
-
उसने दोस्त को बुलाया।
-
अंकित ने बैग खोला।
-
मीरा ने राखी बाँधी।
कर्म कारक का रूप निर्माण (Karm Karak Ka Roop Nirman)
कर्म कारक किसी एक शब्द-भेद से नहीं बनता।
यह संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रियामूल संज्ञा—इन सभी से बन सकता है।
बस एक शर्त है:
उस शब्द पर क्रिया का सीधा असर होना चाहिए।
आइए इसे सरल रूप में देखें:
1. संज्ञा से कर्म बनना
सबसे अधिक कर्म संज्ञा से बनते हैं, क्योंकि वस्तुएँ, व्यक्ति और चीज़ें आमतौर पर क्रिया का प्रभाव झेलती हैं।
उदाहरण:
लड़की ने किताब पढ़ी।
→ “किताब” = संज्ञा = Karm Karak
कैसे बना?
संज्ञा + क्रिया का प्रभाव → कर्म
2. सर्वनाम से कर्म बनना
जब संज्ञा की जगह सर्वनाम प्रयोग हो, तब वही कर्म बन जाता है।
उदाहरण:
शिक्षक ने उसे बुलाया।
→ “उसे” = सर्वनाम = Karm Karak
कैसे बना?
सर्वनाम + क्रिया का प्रभाव → कर्म
3. विशेषण का संज्ञा की तरह प्रयोग
कभी-कभी विशेषण को संज्ञा की तरह इस्तेमाल किया जाता है।
ऐसी स्थिति में वह भी कर्म बन सकता है।
उदाहरण:
मैंने अच्छा चुना।
→ “अच्छा” विशेषण था, लेकिन यहाँ संज्ञा की तरह प्रयोग हुआ
→ कर्म बन गया
कैसे बना?
विशेषण → संज्ञा-रूप → क्रिया का प्रभाव → कर्म
4. क्रिया से बनी संज्ञाएँ
कई शब्द क्रिया से बनते हैं लेकिन उपयोग संज्ञा के रूप में होता है।
ये भी कर्म बनते हैं।
उदाहरण:
उसने लेखन सीखा।
→ “लेखन” क्रियामूल संज्ञा
→ कर्म
कैसे बना?
क्रिया → संज्ञा (लेखन, पठन, गायन) → क्रिया का प्रभाव → कर्म
5. संयुक्त शब्द / वाक्यांश भी कर्म बन सकते हैं
उदाहरण:
मैंने लाल रंग की किताब खरीदी।
→ पूरा वाक्यांश कर्म है
कैसे बना?
संज्ञा + विशेषण + विवरण → क्रिया का प्रभाव → कर्म
सरल फॉर्मूला
जिस शब्द पर क्रिया का असर पड़े = वही रूप कर्म बनेगा।
विशेषज्ञ राय
“Karm Karak को समझना हिंदी वाक्य रचना का सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण चरण है।
यदि छात्र केवल ‘किसे?’ और ‘क्या?’ पूछने की आदत डाल लें, तो 90% वाक्यों में वे आसानी से कर्म कारक पहचान सकते हैं।
निष्कर्ष
Karm Karak कर्म कारक हिंदी व्याकरण का सरल लेकिन बेहद महत्वपूर्ण भाग है।
यदि आप वाक्य में यह पहचान लें कि क्रिया का “सीधा असर” किस पर पड़ रहा है, तो कारक की पूरी समझ अपने-आप आसान हो जाती है।
याद रखिए—
“सीखा हुआ ज्ञान तभी मजबूत होता है, जब उसे बार-बार प्रयोग किया जाए।”
Read Also:
Adhikaran Karak: शानदार परिभाषा व उदाहरण 2025
Apadan Karak की परिभाषा:उदाहरण और नियम 2025
Karta Karak Kise Kahate Hain – परिभाषा, उदाहरण और नियम 2025
Sampradan Karak Kise Kahate Hain: परिभाषा और शानदार उदाहरण 2025
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
1. कर्म कारक क्या होता है?
वह कारक जो क्रिया से सीधे प्रभावित होने वाले शब्द को दर्शाता है, उसे कर्म कारक कहते हैं।
2. कर्म कारक की पहचान कैसे करें?
क्रिया से पूछें—क्या?, किसे?
जो उत्तर मिले वही कर्म कारक।
3. क्या हर वाक्य में कर्म कारक होता है?
नहीं, केवल सकर्मक क्रिया वाले वाक्यों में होता है।
4. क्या ‘को’ लगने वाला शब्द हमेशा कर्म होता है?
अधिकतर मामलों में हाँ, लेकिन यह अनिवार्य नियम नहीं है।
5. क्या सर्वनाम भी कर्म बन सकता है?
हाँ। जैसे—मुझे, तुझे, उसे, उसे।
डिस्क्लेमर
यह लेख सामान्य शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है। सभी उदाहरण, ट्रिक्स और व्याख्या हिंदी व्याकरण की मानक पुस्तकों एवं 2025 के पाठ्यक्रम संदर्भों पर आधारित हैं।
